पहली बारिश ने खोली पोल, 1.36 लाख से ज्यादा घरों में गुल हुई थी बिजली

इंदौर। शहर में बिजली व्यवस्था की बदहाली और पहली बारिश के बाद रातभर छाए अंधेरे का शोर भोपाल तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री कमल नाथ ने अधिकारियों से जवाब मांगा है। मंगलवार को बिजली व्यवस्था पर भोपाल में बैठक बुलाई गई है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी और आला अधिकारी भी बैठक में पहुंचेंगे। कंपनी के मुताबिक रविवार शाम बिजली गुल होने से शहर के 1.36 लाख से ज्यादा बिजली उपभोक्ता प्रभावित हुए। ज्यादातर हिस्सों में रात 12 बजे से पहले आपूर्ति बहाल हो गई थी, कुछ हिस्सों में पूरी रात बिजली नहीं रही।
लसूड़िया से लगे गुलाबबाग, महालक्ष्मीनगर के कुछ हिस्सों, बायपास, कनाड़िया क्षेत्र में सोमवार तड़के चार बजे बाद विद्युत आपूर्ति बहाल हुई। बिजली कंपनी के मुताबिक बारिश और आंधी से हुए फॉल्ट से शहर के 33 केवी के 25 फीडरों और 11 केवी के 154 फीडरों में आपूर्ति बाधित हुई थी। शहर में 33 केवी के 74 फीडर, जबकि 11 केवी के 453 फीडर हैं। चार स्थानों पर ट्रांसफॉर्मर ही गिर गए गए थे। 52 जगह पेड़ गिरने, जबकि छह जगह बिजली लाइन पर होर्डिंग गिरने से भी आपूर्ति बंद हुई।
शहर में छह लाख 53 हजार से ज्यादा बिजली उपभोक्ता हैं। रविवार को बिजली गुल होने से 20 प्रतिशत उपभोक्ता प्रभावित हुए। बिजली कंपनी के मुताबिक करीब आधे फीडरों पर एक घंटे में सुधार कर लिया गया था। कुछ स्थानों पर सुधार कार्य पूरा करने में चार घंटे लगे। मध्य क्षेत्र में बिजली गुल होने की परेशानी न के बराबर रही। कंपनी के अधिकारियों के मुताबिक पूर्व व पश्चिम क्षेत्र में शिकायतें थीं। विजय नगर, सुखलिया, लसूड़िया, एमआर 10, साकेत, श्रीनगर, खजराना, रिंग रोड क्षेत्र में ज्यादा परेशानी थी। वहां भी रात 11 बजे तक आपूर्ति सामान्य कर दी गई थी। कुछ क्षेत्र ट्रांसफार्मरों के फॉल्ट के कारण बिजली गुल हुई, जहां अलसुबह आई। कंपनी ने शहर का सबसे आखिरी सुधार और उपभोक्ता की शिकायत का निराकरण सुबह पौने छह बजे किया।
15 जिलों की बैठक
बिजली गुल होने के बाद बिजली कंपनी के एमडी विकास नरवाल ने रातभर इंदौर व देवास के सप्लाई केंद्रों का निरीक्षण किया। सुबह कंपनी मुख्यालय से सभी 15 जिलों के अधीक्षण यंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बैठक ली गई। एमडी ने आदेश दिया कि 25 जून तक मेंटेनेंस का काम पूरा हो। साथ ही प्राकृतिक आपदा और फॉल्ट से बिजली गुल होने पर किसी भी स्थिति में अधिकतम दो घंटे में सुधार पूरा कर लिया जाए। कॉल सेंटर की व्यवस्था से भी एमडी नाराज दिखे। जिम्मेदार अधिकारियों ने तकनीकी परेशानी का हवाला दिया तो एमडी ने कहा कि जरूरत के वक्त ही कॉल सेंटर काम न आए तो मतलब ही क्या?
चार गुना शिकायत, कॉल सेंटर ठप
पहली बारिश के बाद रविवार को कॉल सेंटर में चार हजार 200 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं। यह संख्या सामान्य दिनों से करीब चार गुना है। बीते चार दिनों से लगातार कॉल सेंटर पर ज्यादा शिकायतें दर्ज हो रही हैं। पहले आम दिनों में हर दिन बिजली गुल होने की औसत शिकायत एक हजार से बारह सौ के बीच होती थी। गुरुवार को चंबल ग्रिड जलने के बाद चार दिनों से शिकायतों की संख्या करीब दो हजार हो गई थी। रविवार को आंधी-बारिश के बाद आंकड़ा चार हजार के पार पहुंच गया। उपभोक्ताओं के मुताबिक रात आठ बजे बाद कॉल सेंटर पर फोन लगना ही बंद हो गए थ
लाइनों की संख्या बढ़ाएंगे
कॉल सेंटर प्रभारी सुधीर आचार्य के मुताबिक कॉल सेंटर ठप नहीं हुआ था, बल्कि एक साथ हजारों फोन आने के चलते फोन कनेक्ट नहीं हो रहे थे। अभी कॉल सेंटर नंबर 1912 पर 120 फोन लाइनें जुड़ी हैं। जल्द ही इन फोन लाइनों की संख्या बढ़ाकर करीब 180 कर दी जाएगी।
एमडी ने शहर के सभी 30 जोन को निर्देश दे दिया है कि कॉल सेंटर के साथ हर जोन पर अब उपभोक्ता की शिकायत सुनने के लिए अलग से हेल्प डेस्क लगा दी जाए। इस पर कर्मचारी 24 घंटे तैनात रहेगा। बारिश के पूरे दौर में हर जोन पर अनिवार्य रूप से हेल्प डेस्क काम करती रहेंगे।

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