ग्रामीण भारत और किसान कल्याण की जवाबदारी मध्यप्रदेश के हवाले

भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नए मंत्रिमंडल में ग्रामीण भारत और देशभर के किसानों का दारोमदार अब मध्यप्रदेश के खाते में आ गया है। प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कद बढ़ाते हुए उन्हें इस बार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज के साथ कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की जवाबदारी जोड़ दी है। मंत्री थावरचंद गेहलोत पर फिर से सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय देकर भरोसा जताया है।
मोदी की नई कैबिनेट में मप्र के चारों मंत्रियों को भारी-भरकम मंत्रालयों की जवाबदारी दी गई है। नई टीम में तोमर के पास बड़ी जवाबदारी आई है उनके पास पिछले कार्यकाल के दौरान ग्रामीण विकास और पंचायती राज के साथ खान एवं संसदीय कार्य मंत्रालय था।
इस बार खान और संसदीय कार्य के बजाए उन्हें कृषि और किसान कल्याण जैसे अति महत्वपूर्ण मंत्रालय की जवाबदारी सौंपी गई है। उल्लेखनीय है कि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा ग्रामीण अंचलों में रहता है और किसानों के मामले भी गांवों से जुड़े हुए हैं।
इसलिए अब यह कहा जा सकता है कि देश के गांवों और किसानों की जवाबदारी मप्र के हिस्से में आई है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रदेश के दूसरे वरिष्ठ मंत्री गेहलोत की जवाबदारी में कोई बदलाव नहीं किया। पांच साल के दौरान इस मंत्रालय में उनके नाम पर कई उपलब्धियां भी दर्ज हैं।
दमोह सांसद प्रहलाद पटेल को बतौर राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय की जवाबदारी सौंपी गई है। संस्कृति मंत्रालय को लेकर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भी विशेष दिलचस्पी रहती है, इसलिए इस महती जवाबदारी के लिए मोदी ने पटेल का चयन किया है। उधर प्रदेश में आदिवासी दिग्गज नेता के रूप में अपनी छबि बना चुके फग्गन सिंह कुलस्ते को बतौर राज्यमंत्री स्टील मंत्रालय का कामकाज सौंपा गया है। पिछली बार भी वह मोदी की टीम में रह चुके हैं।
मध्यप्रदेश के कोटे से राज्यसभा सदस्य एवं मोदी टीम के वरिष्ठ मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस एवं स्टील मंत्रालय की जवाबदारी सौंपी गई है। प्रधान मूलत: ओडिशा के हैं, मप्र लोकसभा चुनाव के दौरान उनके पास राज्य एवं हाईकमान के बीच समन्वय एवं चुनावी रणनीति पर क्रियान्वयन संबंधी जवाबदारी थी।

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