सुमित्रा महाजन, सुषमा स्वराज और उमा भारती जैसे नेताओं को नए दायित्व की संभावनाएं तलाश रही BJP

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी में लोकसभा चुनाव की टिकट से वंचित की गई पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज को नए दायित्‍व का विकल्प पार्टी तलाश रही है। पार्टी हाईकमान के सूत्रों पर भरोसा किया जाए तो इन्हें बड़े राज्यों का राज्यपाल भी बनाया जा सकता है।
ताई का टिकट 75 साल की आयुसीमा पार होने के कारण काटा गया था, तब उन्होंने खुद ही चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान कर दिया था। विदिशा से सांसद रही सुषमा स्वराज ने खुद ही स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर चुनाव नहीं लड़ने का ऐलान किया था। पार्टी नेताओं का कहना है कि जल्द ही ऐसे दिग्गज नेताओं को कहीं न कहीं एडजस्ट किया जा सकता है जिन्हें चुनाव की मुख्यधारा से अलग किया गया है।
तीन महिलाएं राजनीति की मुख्यधारा से बाहर
पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में निर्वाचित हुईं तीन महिला सांसद इस बार राजनीति की मुख्यधारा से बाहर हो गई हैं। इनमें से पूर्व केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज व लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन मध्यप्रदेश सांसद रही हैं और तीसरी पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती उत्तरप्रदेश से सांसद थीं, लेकिन उनका नाता मध्यप्रदेश से है और वह मप्र की मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं।
खास बात यह कि तीनों एक ही दल भारतीय जनता पार्टी से हैं और तीनों ने लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में मध्यप्रदेश के विदिशा संसदीय सीट से पूर्व सांसद सुषमा स्वराज, इंदौर की पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन और राज्य के टीकमगढ़ जिले में जन्मी व पूर्व मुख्यमंत्री व उत्तर प्रदेश के झांसी से पूर्व सांसद केंद्रीय मंत्री उमा भारती की खास पहचान है।
भाजपा में अब ऐसे दिग्गज नेताओं को दायित्‍व पर मंथन चल रहा है, जो चुनावी राजनीति से बाहर हो गए हैं। उनका मानना है कि अब इन्हें पार्टी की मुख्यधारा में नहीं लाया जा सकता है। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो लोकसभा अध्यक्ष रही सुमित्रा महाजन, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमाभारती को नया दायित्‍व की वजह इनका कद है।
पार्टी में उस दौर में भी तीनों ने झंडे गाड़े हैं, जब बहुत कम नेता भाजपा की टिकट पर चुनाव जीत पाते थे। महाजन 1989 से इंदौर से लगातार 2014 तक सांसद चुनी गईं। अटल सरकार में मंत्री भी रहीं। सुषमा स्वराज भी 2009 में लोकसभा में विपक्ष की नेता रह चुकी हैं। केंद्रीय मंत्री रहीं हैं। दिल्ली की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उमाभारती की अगुआई में भाजपा ने 2003 में मध्यप्रदेश में धमाकेदार वापसी की थी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि वरिष्ठता का सम्मान कर जल्द ही एक-डेढ़ महीने में पार्टी इनको नया दायित्‍व सौंप सकती है।

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