मध्य प्रदेश में घटते जनाधार से BSP नेता चिंता में, मायावती ने किया तलब

भोपाल। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान किंग मेकर बनने के ख्वाब देखने वाली बहुजन समाज पार्टी अब अपने अस्तित्व को लेकर चिंतित है। विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव के बाद तो उसके हाथों के तोते ही उड़ गए। दस साल में जनाधार 8.72 से घटकर 2.4 फीसदी ही बचा। पार्टी को राष्ट्रीय दर्जा छिनने की चिंता सताने लगी है। लगातार घटते जनाधार को थामने के लिए आत्ममंथन का दौर चल पड़ा है। बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रदेश प्रभारी रामजी गौतम तीन दिन से पदाधिकारियों के साथ विचार मंथन में जुटे हैं।
एक जून को पार्टी सुप्रीमो मायावती ने प्रदेश इकाई को दिल्ली तलब किया है। मप्र में विधानसभा चुनाव के पांच महीने बाद ही हुए लोकसभा चुनाव के नतीजों ने बसपा हाईकमान की नींद उड़ा दी है। पार्टी का जनाधार बड़ी तेजी से घट गया। विधानसभा चुनाव में जिन सीटों से उसे अच्छी लीड मिली थी, वहां उसके पारंपरिक वोटर ने भी मुंह मोड़ लिया। मप्र में वर्ष 2013 से मौजूदा विधानसभा 2018 तक पांच साल के दौरान बसपा के जनाधार में करीब डेढ़ फीसदी (6.5 से 5.1 प्रतिशत) गिरावट आई। पिछली बार मप्र में बसपा चार सीटों पर जीती थी, लेकिन डेढ़ फीसदी जनाधार गिरने से उसकी दो सीटें ही बचीं।
नवंबर 2018 के बाद मौजूदा लोकसभा चुनाव के दौरान उसका वोट शेयर 5.1 से घटकर मात्र 2.4 फीसदी अर्थात आधे से भी कम रह गया। दस साल पहले 2008 के विस चुनाव में उसे 8.72 फीसदी वोट मिले थे। 1993 और 1998 में बसपा ने विस में 11 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी। अब तो उसके नेता भी साथ छोड़ने लगे हैं।
लोस चुनाव में 26 प्रत्याशी उतारे पर किसी का खाता भी नहीं खुला
लोकसभा चुनाव में मप्र सहित अन्य राज्यों में जिस तरह पार्टी का सफाया हुआ है, उसे देखकर बसपा सुप्रीमो को अब पार्टी का राष्ट्रीय दर्जा छिनने की चिंता सताने लगी है। मप्र में पार्टी ने सपा से चुनावी गठबंधन कर 26 प्रत्याशी लोकसभा चुनाव के मैदान में उतारे थे, लेकिन उसका खाता भी नहीं खुला। जिस रफ्तार से पार्टी का जनाधार सिमट रहा है, यदि यही स्थिति रही तो राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिनने की नौबत आ जाएगी। चुनाव आयोग के नए नियमों के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के अस्तित्व का आकलन किया जाएगा
नवंबर में जिन सीटों पर बढ़त मिली, वहां भी पिछड़ गई
बसपा को नवंबर में जिन सीटों पर बढ़त मिली पांच महीने बाद वहां भी पिछड़ गई। यह स्थिति देखकर मायावती के निर्देश पर मप्र के प्रभारी एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामजी गौतम तीन दिन से प्रदेश एवं जोन के पदाधिकारियों के साथ पार्टी से लोगों के मोहभंग के कारणों को ढूंढने में जुटे हंै। हार के मुख्य बिंदुओं को तलाशकर रिपोर्ट मायावती के सामने रखी जाएगी। एक जून को मायावती ने दिल्ली में पार्टी पदाधिकारियों की बड़ी बैठक बुलाई है। इसमें मप्र बसपा अध्यक्ष डीपी चौधरी और प्रदेश प्रभारी गौतम सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों को भी तलब किया गया है। हाल ही में नियुक्त पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष पर भी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
दिल्ली में होगी रणनीति पर चर्चा
विस और लोस चुनाव में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिलने की समीक्षा की जा रही है। तीन दिन से जोन और प्रदेश पदाधिकारियों व जिला स्तर से भी हमने फीडबैक लिया है। पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक जून को दिल्ली में बड़ी बैठक बुलाई है, जिसमें आगामी रणनीति पर चर्चा होगी।

  • रामजी गौतम, प्रभारी मप्र बसपा

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