एमपी में लोगू हो सकता है डिप्टी सीएम फॉर्मूला, सिंधिया के नाम की फिर उठी मांग

भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बाद केंद्रीय नेतृत्व नाखुश है। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस में भी हलचल ते ज हो गई है। जिन्होंने अपनी जिम्मेदारी ठीक से नहीं निभाई उन पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। खबर है कि आधा दर्जन मंत्रियों को संगठन मज़बूत करने के लिए भेजा जा सकता है। इसके साथ ही प्रदेश की सियासत को साधने के लिए एक बार फिर उप मुख्यमंत्री के फॉर्मूले की अटकलें तेज हो गईं हैं। खबर है कि शीर्ष नेतृत्व राजस्थान की तरह प्रदेश में भी उप मुख्यमंत्री बनाने पर विचार कर रहा है। जिससे प्रदेश का बेहतर विकास हो सके। सूत्रों के मुताबिक इस पद के लिए एक बार फिर पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम उनके समर्थक ले रहे हैं। वह मांग कर रहे हैं कि सिंधिया को प्रदेश की कमान दी जाना चाहिए। या फिर उन्हे उप मुख्यमंत्री बनाया जाए।
दरअसल, कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी कमलनाथ और सिंधिया दोनों नेताओं को साधने के चलते सीएम और डिप्टी सीएम का फार्मूला लाए जाने की अटकलें थी। लेकिन तब ऐसी चर्चा थी कि सिंधिया इसके लिए राजी नहीं हुए। जिसके बाद कमलनाथ को सीएम बनाया गया। अब एक बार फिर डिप्टी सीएम के फार्मूले की चर्चा गरमा गई है । लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद संगठन स्तर पर भी बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं। जिसके चलते आने वाले समय में बड़े फैसले लिए जा सकता हैं। विधानसभा चुनाव के समय भी इस फार्मूले पर चर्चा हुई थी। हार के बाद उठ रहे बवाल को थामने के लिए और पार्टी में संतुलन बनाए रखने के लिए हाईकमान इस फार्मूले का प्रयोग कर सकता है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि डिप्टी सीएम के लिए पहला नाम सिंधिया का हो सकता है या फिर सिंधिया ही किसी अन्य का नाम का सुझा सकते हैं।
इससे पहेल भी कांग्रेस की सरकार में उप मुख्यमंत्री बनाए जा चुके हैं। शवभानुसिंह सोलंकी, प्यारेलाल कंवर, जमुना देवी, और सुभाष यादव उप मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वर्तमान हालातों को देखते हुए मुख्यमंत्री कमलनाथ सरकार में शामिल पांच या छह मंत्रियों को संगठन में भेज सकते हैं। ये वे मंत्री हैं जिनके पास संगठन में काम करने का अनुभव है। इसके स्थान पर उन लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा जो नाराज बताए जा रहे हैं।

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