देवी खुद करती हैं अग्नि स्नान; मान्यता है इसे देखने वाले की मुराद पूरी होती है

उदयपुर। आपने हिमाचल के ज्वाला देवी मंदिर के बारे में सुना होगा। यहां देवी मां की ज्वाला (अग्नि) सदियों से खुद ही प्रज्ज्वलित है। अग्नि का जरिया क्या है, ये कभी क्यों नहीं बुझती है, इसका पता आज तक नहीं लग सकता है। ऐसा ही एक मंदिर है उदय पुर का ईडाणा माता मंदिर। बरगद के पेड़ के नीचे यहां देवी विराजमान हैं और मान्यता है कि प्रसन्न होने पर वह खुद अग्नि स्नान करती हैं। इस दृश्य को देखने वाले हर किसी की मुराद पूरी होती है।

यह मंदिर उदयपुर की अरावली पर्वत श्रंखला के बीच बंबोरा गांव में है। मंदिर में आग कैसे लगती है और कैसे बुझती है, यह कोई नहीं जानता। इसी वजह से श्रद्धालुओं की मंदिर पर आस्था अटूट है। वो इस घटना को चमत्कार कहते हैं।

मंदिर में कैसे लगती है और कैसे बुझती है, इसके बारे में कोई आजतक पता नहीं लगा सका है।

मंदिर में कैसे लगती है और कैसे बुझती है, इसके बारे में कोई आजतक पता नहीं लगा सका है।

कहा जाता है कि मंदिर में अपने आप आग लगती है। आग लगते ही देवी मां के सारे कपड़े और आसपास रखा भोजन जल जाता है। माता रानी का यह अग्नि स्नान काफी विशालकाय होता है, जिसके चलते कई बार नजदीक के बरगद के पेड़ को भी नुकसान पहुंचता है। लेकिन, आज तक माता रानी की मूर्ति पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु
यहां दूर-दूर से श्रद्धालु देवी मां के जयकारे लगाते हुए आते हैं। इस साल कोरोनावायरस संक्रमण के चलते नवरात्र में ईडाणा माता मंदिर में मेले तो नहीं हो रहा है, पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ श्रद्धालु माता रानी के दर्शन कर सकते हैं। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि इस बार ईडाणा माता मंदिर में कोरोनावायरस संक्रमण के खात्मे को लेकर विशेष पूजा-अर्चना भी की गई।

इस तरह पहुंचा जा सकता है मंदिर
उदयपुर शहर से 60 किमी. दूर कुराबड-बम्बोरा मार्ग पर मेवाड़ का प्रमुख शक्तिपीठ ईडाणा माता मंदिर है। कुराबड तक आपको बस मिल जाती है। अपने वाहन से भी यहां आया जा सकता है। इस मंदिर के ऊपर कोई छत नहीं है और एकदम खुले चौक में स्थित है, यह मंदिर उदयपुर मेवल की महारानी के नाम से प्रसिद्ध है।

वैज्ञानिक पुष्टि नहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन द्वारा इसे स्वीकार गया

हालांकि वैज्ञानिक तौर पर इस मंदिर में माता रानी के अग्नि स्नान की पुष्टि अब तक नहीं की गई है, लेकिन मान्यताओं के अनुसार यहां पर माता रानी स्वयं ही अग्नि स्नान करती है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और प्रशासन द्वारा इसे स्वीकार किया गया है।

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