कोर्ट रूम में जांची कॉपी तो बढ़े 6 नंबर, शिक्षकों को कोर्ट ने सुनाई सजा

इंदौर। 12 वीं की परीक्षा में छात्र ने सभी विषयों में विशेष योग्यता तो हासिल कर ली, लेकिन बोर्ड द्वारा दिए नंबरों से वह संतुष्ट नहीं था। उसे आशंका थी कि दो विषयों की कॉपी जांचने में लापरवाही हुई है, इस वजह से उसे कम अंक मिले हैं। उसने माध्यमिक शिक्षा मंडल में दोबारा मूल्यांकन करने की गुहार लगाई। लेकिन उसका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि पुनर्मूल्यांकन का प्रावधान ही नहीं है। इस पर छात्र ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट रूम में कॉपी जंची तो 6 अंक बढ़ गए। कोर्ट ने पूर्व में छात्र की कॉपी जांचने में लापरवाही करने वाले शिक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
मामला उज्जैन निवासी छात्र प्रखर पंडित का है। उसने 2018 में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित 12वीं की परीक्षा दी थी। परीक्षा में उसे अंग्रेजी में 100 में से 88 और फिजिक्स में 75 में से 63 अंक मिले थे। इन अंकों से असंतुष्ट होकर प्रखर ने बोर्ड में रिवेल्यूएशन के लिए आवेदन दिया। बोर्ड ने आवेदन पत्र यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रेग्यूलेशन 119 के तहत बोर्ड की परीक्षाओं में रिवेल्यूएशन पर रोक लगा दी गई है। इस पर छात्र ने पुनर्गणना आवेदन दिया, लेकिन इसमें भी अंक नहीं बढ़े। छात्र ने मॉडल ऑन्सर शीट से स्वमूल्यांकन किया तो पता चला अंग्रेजी व फिजिक्स में कम अंक दिए हैं। छात्र ने एडवोकेट धर्मेंद्र चेलावत के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
दूसरे शिक्षकों से जंचवाईं कॉपियां
जस्टिस विवेक रूसिया ने आदेश दिया कि जिन शिक्षकों ने छात्र की कॉपी जांची थी उन्हें छोड़कर दो दूसरे शिक्षकों को कोर्ट में कॉपी जांचने के लिए भेजा जाए। फिर उन्होंने कॉपियां जांचीं।

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