भाजपा को 10 हजार से कम अंतर वाली 6 सीटों की चिंता, मंत्री- सांसदों को जिम्मा, गेम प्लान – बहुमत के लिए किसी भी तरह 9 सीटें लाएं

  • सात सीटों पर वोटों की बड़ी खाई, छह कम अंतर से जीती थीं

भोपाल। उपचुनाव में 107 सीटों के साथ उतर रही भाजपा उन छह सीटों पर ज्यादा फोकस कर रही है, जहां पिछले चुनाव में कांग्रेस को 10 हजार से कम वोटों से जीत मिली थी। इन सीटों पर भाजपा प्रत्याशी वे ही हैं, जो कांग्रेस से जीते थे। वहीं पार्टी उन सात सीटों को सेफ मान रही है, जो मौजूदा भाजपा प्रत्याशियों ने पिछले चुनाव में बतौर कांग्रेस उम्मीदवार 20 हजार से ज्यादा वोटों से जीती थीं। भाजपा 12 सीटों को सिंधिया कैंप के बाहर की मान रही है। इनमें अनूपपुर, सुवासरा, सुमावली, मुरैना, अंबाह, गोहद, नेपानगर, बड़ा मलहरा, मांधाता, जौरा, ब्यावरा और आगर शामिल हैं। इधर, सिंधिया कैंप की सीटों पर मुकाबला कड़ा होना संभावित है, लिहाजा भाजपा ने कोई रिस्क न लेते हुए मंत्रियों, सांसदों व पूर्व मंत्रियों को जिम्मेदारी दी है। सिंधिया खेमे की सीटों के लिए अलग प्लान है।

प्लान : 19 मंत्री, 25 सांसद व 95 विधायक उतरे

  • 19 मंत्रियों, 25 सांसदों और 95 विधायकों की टीम मैदान में उतारी है। हर सीट के चुनाव प्रभारी के साथ जिलाध्यक्ष व उनकी टीम लगाई गई है। संगठन मंत्री इनसे बात कर रहे हैं।
  • सीट से लेकर बूथ और पन्ना प्रमुख तक 60 से 70 लोगों की टीम है। हर पन्ना प्रमुख के पास 30 से 50 वोटरों का दायित्व है। ये उन्हें निकालकर बूथ तक पहुंचाएंगे।
  • मुरैना, सुमावली, गोहद और अंबाह में चार प्रभारियों के साथ केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा नजर रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री रोजाना फीडबैक ले रहे हैं।

भाजपा का गणित
भाजपा के पास अभी 107 सीटें हैं। बहुमत के लिए 116 चाहिए। नौ सीटें जीतते ही भाजपा बहुमत में आ जाएगी। निर्दलीय प्रदीप जायसवाल को खनिज निगम का अध्यक्ष बनाकर भाजपा पहले ही अपने साथ कर चुकी है। बाकी तीन निर्दलीय भी साथ आते हैं तो भाजपा पूरी तरह बहुमत में होगी।

सिंधिया खेमे के सात पूर्व विधायक अब भाजपा में हैं। ये पिछला चुनाव बड़े अंतर से जीते थे।

यहां है कमजोर कड़ी : यह छह सीटें 10 हजार से कम अंतर से जीतीं थीं-

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