हाथरस कांड से सीएम योगी की खोई साख वापस दिलाएगी सीबीआई, यूपी सरकार और बीजेपी को भरोसा

नई दिल्ली। योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह अपनी निगरानी में हाथरस कांड की सीबीआई जांच करवाए। उसने देश के सर्वोच्च अदालत से नोटिस मिलने का भी इंतजार नहीं किया और खुद ही एक हलफनामा जमा करवा दिया। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यूपी सरकार हाथरस केस की सीबीआई जांच को लेकर इतना उतावला क्यों हो गई जबकि उसने इसका निर्देश देने में अच्छा-खासा वक्त लगा दिया।
योगी सरकार की जबर्दस्त फजीहत
दरअसल, हाथरस कांड ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की छवि पर जबर्दस्त कुठाराघात किया है। एफआईआर लिखने में देरी से लेकर पीड़िता का शव रातोंरात जला देने तक और फिर मीडिया या नेताओं को पीड़िता के परिजनों से दूर रखने की प्रशासनिक जिद ने सरकार की खूब फजीहत कराई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध और अपराधियों के प्रति अपनी कठोर छवि को ठेस पहुंचते देख मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया।
खोई छवि वापस पाने की जद्दोजहद
सरकार और बीजेपी के शीर्ष नेताओं को लगा कि हाथरस कांड के बहाने योगी की छवि पर प्रहार करने का राजनीतिक षडयंत्र रचा जा रहा है। विपक्षी नेताओं और मीडिया के कुछ सेक्शन पर ऐसा संदेह अपनी जगह सही या गलत हो सकता है, लेकिन इस हकीकत से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि योगी सरकार ने ऐसे बड़े मामलों में डीएम, एसएसपी जैसे बड़े अधिकारियों पर गाज गिराने की पुरानी रिवायत का भी पालन नहीं किया। उन्होंने एसपी समेत कुछ अन्य अधिकारियों को हटाया, लेकिन डीएम को फटकार तक नहीं लगाई। इससे विपक्ष को आक्रोश भड़काने में मदद मिली।
विपक्ष ने कर दिया ‘कांड’
मुख्यमंत्री योगी के नजदीकी नेताओं ने हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स से कहा भी कि हाथरस केस पर कैंपेन चलाकर योगी की इमेज खराब करने और 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में जातीय हिंसा भड़काने की मंशा साफ झलक रही है। उन्होंने इस दलील के समर्थन में कहा कि 14 सितंबर को घटना होने के पांच दिन तक लड़की और उसके परिवार ने सिर्फ एक व्यक्ति पर आरोप लगाया था, वह भी जानलेवा हमले का। लेकिन, अलीगढ़ के अस्पताल में पीड़िता के परिजनों से विपक्षी नेताओं ने मुलाकात की और पीड़िता ने 22 सितंबर को अपना बयान बदल लिया। उसने कहा कि चार लोगों ने उसके साथ गैंगरेप किया।
इसलिए सीबीआई जांच पर जोर?
इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया ताकि सचाई सामने आ सके। उधर, फॉरेंसिक जांच में दावा किया जा चुका था कि पीड़िता का बलात्कार नहीं हुआ। यह रिपोर्ट आने के बाद सरकार और प्रशासन की मंशा पर संदेह गहरा गए। इसी वक्त कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने हाथरस जाने की ठान ली। उधर, एक ऑडियो वायरल हो गया जिसमें एक मीडिया पर्सन पीड़िता के भाई पर अपने पिता से वीडियो रेकॉर्ड करवाने की दबाव बना रही थी। ऐसे में योगी सरकार ने सीबीआई जांच का आदेश दे दिया। उसे उम्मीद है कि सीबीआई की जांच रिपोर्ट आने के बाद योगी सरकार की गिरती साख को फिर से मजबूती मिलेगी।

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