सुप्रीम कोर्ट में अब चीफ जस्टिस और 7 वरिष्ठ जज सुनेंगे जनहित याचिका, 5 अक्तूबर से होगा बदलाव

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में 5 अक्तूबर से जनहित याचिकाओं (पीआईएल), पत्र याचिकाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों की सुनवाई चीफ जस्टिस एसए बोबडे और सात अन्य वरिष्ठ जज ही करेंगे। इसके लिए बृहस्पतिवार को जजों के बीच मुकदमों के बंटवारे का नया रोस्टर जारी कर दिया गया। पिछले साल 29 नवंबर को जारी हुए आखिरी रोस्टर में पीआईएल और सामाजिक न्याय के मामलों की सुनवाई चीफ जस्टिस व तीन अन्य सबसे वरिष्ठ जजों को ही सौंपी गई थी। लेकिन नए रोस्टर में चीफ जस्टिस के अलावा सबसे वरिष्ठ जज जस्टिस एनवी रमन्ना और अन्य वरिष्ठ जज जस्टिस आरएफ नरीमन, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एल. नागेश्वर राव ही पीआईएल और सामाजिक न्याय के मामलों की सुनवाई करेंगे, जिनमें अमूमन केेंद्र व राज्य सरकारें और उनके विभाग ही प्रतिवादी के तौर पर शामिल रहते हैं।
पीआईआल के अलावा चीफ जस्टिस बोबडे ने अवमानना, बंदी प्रत्यक्षीकरण, सामाजिक न्याय, प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर और चुनावी मामलों की सुनवाई को अपने पास रखा है। चुनावी मामलों के अलावा सीजेआई सांविधानिक अधिकारियों की नियुक्ति और ऐसे मामलों की सुनवाई भी करेंगे, जो खासतौर पर उनके पास भेजे गए हों। सात सबसे वरिष्ठ जजों को सीजेआई की तरफ से पत्र याचिकाएं व पीआईएल का आवंटन किया जाएगा।
जस्टिस रमन्ना मध्यस्थता, मुआवजा, धार्मिक व धर्मार्थ निधि और न्यायिक अधिकारियों से जुड़े मामले भी सुनेंगे। जस्टिस नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ को कंपनी कानून, परिवार व व्यापारिक कानून, व्यवसायिक और बैंकिंग लेनदेन से जुड़े मामलों की सुनवाई सौंपी गई है। बता दें कि सामान्य समय में अदालत कक्ष में आमने सामने की सुनवाई के दौरान चलने वाली 14-15 पीठ के मुकाबले कोरोना वायरस महामारी के कारण फिलहाल शीर्ष अदालत की 6 से 7 पीठ ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई कर रही हैं।

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