अधिमास 16 अक्टूबर तक, इसके बाद भी हैं बारिश के नक्षत्र, जानिए क्या कह रहा ज्योतिष

मानसून की विदाई में देश के एक बड़े हिस्से में भारी बारिश देखने को मिल रही है। हालांकि मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून अब कुछ दिनों का बचा है, लेकिन ज्योतिष के मुताबिक, अभी बारिश के नक्षत्र हैं। ऋषिकेश, महाबीर और काशी हिंदू विश्वविद्यालय के विश्व प्रसिद्ध पंचांग के अनुसार, वर्षा का योग अभी पूरे पुरुषोत्तम मास में है। आश्विन मास में यह अधिमास 16 अक्टूबर तक है। इसके बाद तक बारिश के नक्षत्र हैं और इसमें अंतिम स्वाति का आरंभ ही 24 अक्टूबर से हो रहा है। इनमें अभी खंड वृष्टि के साथ सामान्य वृष्टि दर्शाई गई है। बता दें, अधिमास के कारण ही श्राद्ध पक्ष के तत्काल बाद नवरात्र शुरू नहीं हुए हैं।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर कार्यपालक समित के पूर्व सदस्य ख्यातिलब्ध ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी बताते हैं, ज्योतिष शास्त्र में ऋतु चक्र के प्रवर्तक भगवान सूर्य माने जाते हैं। यही कारण है कि वर्षा ऋतु की शुरुआत भगवान सूर्यदेव के आद्रा नक्षत्र में प्रवेश के साथ शुरू होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, आमतौर पर 21-22 जून को किसी भी समय भगवान भास्कर इस नक्षत्र में प्रवेश करते हैं और वर्षारंभ होता है और स्वाति नक्षत्र पर्यंत चलता है। इस दौरान वह कुल 10 वर्षा नक्षत्रों से गुजरते हैं।
इस साल आद्रा नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश 22 जून को दिन में 7.11 बजे हुआ था। वर्तमान में उत्तरा फाल्गुनी में सूर्य का प्रवेश 13-14 सितंबर की रात 12.51 बजे हुआ और 27 सितंबर को दोपहर 3.35 बजे हस्त नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। वहीं 11 अक्टूबर की भोर 04.05 बजे उनका चित्रा (चिरइया) नक्षत्र में प्रवेश होगा और 24 अक्टूबर को दिन में 10.34 बजे स्वाति नक्षत्र में जाएंगे। इनमें हस्त्र (हथिया) नक्षत्र का अपना विशिष्ट महत्व है। इस समय धरा पानी-पानी हो जाती है। प्राचीन कृषि मनीषियों ने इस नक्षत्र के बारे में कहा भी है-“हथिया के बरसले से माई के परसले से” अर्थात हस्त नक्षत्र की बरसात धरती माता को उसी तरह तृप्त कर देती है जैसे माता अपने बेटे को स्नेहपूर्वक भोजन करा कर संतोष देती है। हालांकि प्रायः चित्रा नक्षत्र तक ही वर्षा अधिक होती है, स्वाति में बारिश का असर कम देखने को मिलता है।
स्त्री संज्ञक नक्षत्र और जला नाड़ी
वहीं काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ज्योतिष विभाग के अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय कहते हैं, अभी उत्तरा फाल्गुनी सूर्य नक्षत्र चल रहा है। सूर्य और चंद्रमा का स्त्री योग अर्थात स्त्री संज्ञक नक्षत्र में युति है और जला नाड़ी चल रही है। ग्रह स्थितियां भी सामान्य वृष्टि सूचक बन रही हैं। इसलिए 27 सितंबर तक सामान्य वृष्टि का योग है। इसके बाद भी हस्त नक्षत्र में सूर्य का गमन हो रहा है। सूर्य चंद्रमा का योग क्रम से स्त्री एवं पुरुष नक्षत्र पर होगा और अमृत नाड़ी होगी जिसका अधिपति चंद्रमा है। ग्रहों की स्थिति भी इसके अनुकूल है, अतः 10 अक्टूबर तक वृष्टि का योग रहेगा। इसके बाद चित्रा के सूर्य से और अन्य ग्रह स्थितियों के प्रभाव से वातावरण सामान्य हो जाएगा, तथापि यत्र-तत्र खंड एवं अल्प वृष्टि का योग बना रहेगा।

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