हिंदी हमारी मजबूरी नहीं, ताकत है… हासिल कर सकते हैं सर्वोच्च सफलता

सिविल सेवा परीक्षा में सफलता किसी भी युवा का सपना होता है। इस सपने को पूरा करने के लिए हिंदी माध्यम से हजारों अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठते हैं लेकिन उन्हें इस प्रतिष्ठित परीक्षा के हर स्तर पर असफलता का डर सताता रहता है। परंतु हिंदी माध्यम के युवाओं की यह धारणा अब बदल रही है। हर साल हिंदी माध्यम से बहुत से अभ्यर्थी इस परीक्षा में न केवल सफल हो रहे हैं, बल्कि शीर्ष 100 में अपनी जगह बना रहे हैं। सिविल सेवा परीक्षा में हिंदी माध्यम से सफलता की कुछ दिलचस्प कहानियां यह बताती है कि हिंदी हमारी मजबूरी नहीं ताकत है।
अपनी चीजों से प्रेम होना चाहिए
हिंदी में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए अच्छी किताबें बेहद जरूरी है। हमें अपनी चीजों से प्रेम होना चाहिए सबसे बड़ी समस्या, यह मान्यता है कि जो अंग्रेजी में लिखा है, वही प्रामाणिक है। सरकार नई शिक्षा नीति में इसे महत्व दे रही है कि हमारी मातृभाषा ही हमारी शिक्षा का पहला माध्यम बने। – डॉक्टर कृष्णकांत पाठक आईएएस
सही प्रतिबद्धता हो तो माध्यम आड़े नहीं आता
मैंने हिंदी माध्यम से दो बार यूपीएससी में सफलता हासिल की पहली बार रेल यातायात सेवा में जाने का मौका मिला। दूसरी बार मुझे पुलिस सेवा में आने का मौका मिला। सही प्रतिबद्धता से काम करने पर माध्यम आड़े नहीं आता। -हरिनारायण चारि आईपीएस
हिंदी ने ही मुझे खुद को अभिव्यक्त करना सिखाया
मैं इसे अपनी खुशकिस्मती मानता हूं कि मुझे अपनी शिक्षा का आधार हिंदी में मिला। हिंदी ने ही मुझे खुद को अभिव्यक्त करना सिखाया। जो मैं सोचता हूं, उसे सही शब्दों में बोलना और लिखना सिखाया। परीक्षा में जवाब लिखते समय आप की सृजनात्मकता परखी जाती है। – कौशल राज शर्मा आईएएस
जीवन शैली में हिंदी को शामिल कीजिए
आज विद्यार्थी यह नहीं कह सकता कि हिंदी में सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में उसे कोई दिक्कत है। दिक्कत मनोवृत्ति की है। अपने को कमतर न मानें। जिस हिंदी को आप मजबूरी समझ रहे हैं, उसे अपनी मजबूती बनाइए। अपनी जीवनशैली में हिंदी को शामिल कीजिए। – निशांत जैन आईएएस
भाषा-विषय पर समझ बेहतरीन और स्पष्ट हो
सफलता माध्यम पर नहीं बल्कि आपके संकल्प और मेहनत पर निर्भर करती है। परीक्षार्थी यह ख्याल रखें कि भाषा और विषय पर समझ बेहतरीन और स्पष्ट होनी चाहिए। अपने विषय पर मजबूत पकड़ और खुद पर भरोसा रखें तो सब कुछ संभव है। – दीपक वर्णवाल आईपीएस

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