मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी कलेक्टर को आदेश जारी किए; लिखा ज्यादा फीस लेने वाले स्कूलों पर कार्रवाई करें

  • सभी निजी स्कूल 24 मार्च 2020 की स्थिति में सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकते हैं
  • आज सुबह 7 बजे से कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक की ऑन लाइन क्लास शुरू नहीं हुई

भोपाल। मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने ट्यूशन फीस को लेकर सभी कलेक्टर को निर्देश दिए हैं। इसमें कहा गया है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब स्कूल सिर्फ ट्यूशन फीस ही ले सकते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के उप सचिव केके द्विवेदी ने इसके आदेश जारी किए है।

इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि सभी निजी स्कूल 24 मार्च 2020 की स्थिति में सिर्फ ट्यूशन फीस ले सकते हैं। अधिक फीस वसूलने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमों के तहत कार्यवाही की जाएगी। इधर, सोमवार सुबह 7 बजे से सुबह 10 बजे एमपी बोर्ड की 9 वीं से लेकर 12वीं तक की कक्षाओं की ऑनलाइन क्लास शुरू नहीं हो सकी। इसका प्रसारण दूरदर्शन पर होना था। पीएस स्कूल शिक्षा विभाग ने इसे रद्द कर दिया है।

पहले की घोषणा के अनुसार ही फीस ली जाएगी

उप सचिव केके द्विवेदी ने बताया कि मार्च तक कई स्कूलों ने सत्र 2020-21 की फीस को लेकर घोषणा कर दी थी। इसकी जानकारी भी उन्होंने दे दी थी। इसमें सिर्फ ट्यूशन फीस ही स्कूलों को लेना होगी। जिन स्कूलों ने फीस की घोषणा नहीं की, वह स्कूल पिछले साल के आधार पर घोषित ट्यूशन फीस लेंगे। इसके अतिरिक्त कोई भी चार्ज या अन्य तरह के शुल्क नहीं लिए जा सकते हैं।

इसलिए अभिभावकों का विरोध है

अभिभावकों का आरोप है कि कई स्कूलों ने सालभर की फीस को ही ट्यूशन फीस में जोड़ दिया। यह फीस लेने पर स्कूल संचालक दबाव बना रहे है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग का साफ कहना है कि ऐसा करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

इस तरह चला पूरा मामला

फीस को लेकर सबसे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने निजी स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश जारी किए थे। बावजूद इसके कई स्कूल पूरी फीस वसूलने पर अड़े थे। इसको लेकर कुछ स्कूलों ने हाईकोर्ट बेंच इंदौर में याचिका लगाई थी। जिस पर कोर्ट ने सरकार के आदेश पर स्थगन दिया था। इसी बीच हाईकोर्ट जबलपुर की बेंच में एक स्कूल के मामले में हाईकोर्ट ने सरकार के आदेश को सही बताते हुए सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के आदेश दिए। दो आदेश होने से मामला जबलपुर हाईकोर्ट की डबल बेंच में चला गया था। इस पर कोर्ट ने सिर्फ ट्यूशन फीस लिए जाने के आदेश जारी किए।

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