परीक्षा सेंटर तक पहुंचने के लिए बाइक से बेटी को लेकर 100 किलोमीटर का सफर किया

  • अभिभावक बोले- शाम से ही सरकारी नंबर पर फोन लगाना शुरू किया था, रात तक कॉल नहीं लगा
  • अंधेरे और बारिश के बीच भी बच्चों को बाइक से ही सेंटर तक लेकर आए

भोपाल। भोपाल में भी आज से जेईई एग्जाम शुरू हो गया है। शहर में परीक्षा के लिए 4 केंद्र बनाए गए हैं। हर केंद्र में करीब 240 बच्चों को परीक्षा दिलवाने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन द्वारा बच्चों को सेंटर तक पहुंचाने के लिए परिवहन सुविधा दिए जाने की हकीकत परेशान कर देने वाली है। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे अभिभावकों ने शासन-प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था की पोल खोली। अभिभावकों का कहना था कि व्यवस्था तो दूर की बात रही, कॉल ही नहीं लगा। इसके कारण तनाव भी आया और गुस्सा भी, लेकिन बच्चों के भविष्य का सवाल था। इसलिए फिर खुद ही उन्हें लेकर सेंटर तक पहुंचे।

100 किलोमीटर लगातार चलाई गाड़ी
भोपाल से करीब 100 किलोमीटर दूर शाजापुर के कालापीपल से दिनेश अपनी बेटी को लेकर अयोध्या बायपास स्थित कॉलेज में बने जेईई एग्जाम सेंटर पहुंचे। उन्होंने बताया- एक दिन पहले समाचारों के जरिए सरकार द्वारा बच्चों को सेंटर तक पहुंचाने के लिए गाड़ियों का इंतजाम किए जाने की जानकारी मिली थी। इसके लिए टोल फ्री नंबर 181 पर हम लगातार कॉल करते रहे। क्योंकि उसमें रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी था। घंटों मैं और दूसरे लोग भी फोन लगाते रहे, लेकिन कॉल लगा ही नहीं। कल रात तक भी यही स्थिति रही। ऐसे में हम कोई दूसरा इंतजाम भी नहीं कर पाए। बेटी के बेहतर भविष्य के लिए रात 12 बजे हमने उसे अपनी बाइक से ही भोपाल लाने का निर्णय किया। रातभर इसकी तैयारी की। तड़के करीब 3 बजे बेटी को उठाया। नाश्ता कराने के बाद मैं उसे बाइक से लेकर भोपाल आया। लगातार 3 घंटे से ज्यादा समय तक बाइक चलाई। मेरे साथ विक्रम मालवीय भी इसी तरह परेशान होते रहे। अंधेरा होने के कारण सड़क पर कुछ साफ नजर नहीं आ रहा था। कई जगह पानी भरा होने के कारण परेशानी भी हुई। सरकार ने तो अच्छी सुविधा देने की बात कही थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया। अगर इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं थी, तो फिर आश्वासन देने की जरूरत नहीं थी। क्योंकि अगर हमें शासन का आश्वासन नहीं मिला होता, तो हम पहले ही कोई और गाड़ी का इंतजाम कर लेते। ऐसे में इतनी परेशानी नहीं होती।

इस पर भी नाराजगी
अब तक अभिभावकों को सेंटर के कैंपस में प्रवेश दिया जाता था। ऐसे में वह अंदर बैठकर अपना समय निकाल लेते थे, लेकिन इस बार कोविड-19 के चलते छात्रों के अलावा किसी को भी कैंपस में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। अभिभावकों को बाहर सड़क पर ही खड़े रहना पड़ा। इसको लेकर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। यहां न तो पीने के पानी का इंतजमा था और न ही बैठने तक की जगह। हालांकि परीक्षा आयोजित कराने वाले कर्मचारी बीच-बीच में लोगों को सड़क से दूर रहने की हिदायत देते रहे, ताकि किसी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके।

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