देश में 30 लाख बेरोजगार, सबको सरकारी नौकरी देने में लगेंगे 20 साल, हर साल 4 लाख की दर से बढ़ रही बेरोजगारी

भोपाल। रोजगार पंजीयन के दफ्तरों में बेरोजगारों की कुल संख्या 32 लाख 57 हजार 136 है। इनमें से मप्र के मूल निवासी 29 लाख 81 हजार हैं। शेष बाहरी हैं। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि सरकारी नौकरी अब मप्र के लोगों को ही मिलेगी। साफ है कि इस फैसले से मप्र के युवाओं को फायदा तो होगा, लेकिन रोजगार पंजीयन के दफ्तरों से मिले आंकड़ों पर ही भरोसा करें तो सभी बेरोजगारों को नौकरी देने में सरकार को करीब 20 साल से ज्यादा का समय लग जाएगा।

यह स्थिति भी तब है, जब मौजूदा खाली पदों के हिसाब से हर साल एक लाख लोगों की भर्ती हो। इस समय प्रदेश के अलग-अलग विभागों में एक लाख के करीब पद खाली हैं। यदि यह भर्ती कर ली जाती है तो सरकार के खजाने पर 8 से 10 हजार करोड़ रु. का भार आएगा। इसलिए राज्य सरकार को नए विकल्प भी देखने होंगे। रोजगार और स्किल्ड के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी नौकरी के साथ निजी क्षेत्र के लिए भी सरकार को कुछ ठोस प्रावधान करने होंगे।

एक तथ्य और भी है कि हर साल साढ़े तीन से चार लाख ग्रेजुएट्स पास होकर निकल रहे हैं। इनमें से कुछ उच्च शिक्षा के लिए जाते हैं बाकी काम की तलाश में लगते हैं। यानी राज्य सरकार के सामने चुनौती बड़ी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पिछले कार्यकाल में निजी क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्योगों में 50 फीसदी स्थानीय नौकरी अनिवार्य की थी। पूर्व की कमलनाथ सरकार ने इसे बढ़ाकर 70 प्रतिशत कर दिया था। अब नए विकल्प भी देखने होंगे।

दो साल ही सक्रिय रहा रोजगार बोर्ड
शिवराज सिंह के पिछले कार्यकाल में 2016 में मप्र रोजगार बोर्ड का गठन किया गया था, जिसके पास जिम्मा था कि वह निजी क्षेत्र में संभावनाएं तलाश कर स्किल्ड युवाओं को ट्रेंड करे और कंपनियों में नौकरी दिलाए। वर्ष 2018 तक यह बोर्ड चला और तत्कालीन अध्यक्ष हेमंत देशमुख ने ग्लोबल स्किल्ड समिट और रोजगार मेले लगाए। करीब 90 हजार लोगों को उत्पादन व सर्विस सेक्टर में नौकरी मिली। इसके बाद काम ठप हो गया।

हर साल एक लाख नौकरी दिलाने की शर्त
मौजूदा व्यवस्था से काम नहीं हुआ तो पंद्रह जिलों में पीपीपी मोड पर जिला रोजगार दफ्तरों के संचालन की तैयारी की गई। अभी तक उसका उदघाटन नहीं हुआ। इन्हें इस शर्त पर रोजगार दफ्तर दिए गए है ताकि ये हर साल दो लाख के सालाना वेतन पर एक लाख लोगों को निजी क्षेत्र मेें रोजगार दिलवाएं।

स्कूली शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा पद खाली

विभागपदभरे हुएरिक्त
स्कूल शिक्षा1,13,84583,24530,600
गृह93,915845279388
स्वास्थ्य47044384528592
अजा-अजजा37425332454180
राजस्व20744112149530
कृषि1012962003929
जल संसाधन808967171372
शेष अन्य1000698400016,069
सब इंजीनियर922572102015
इंजीनियर23502000350

ऑनलाइन पंजीयन से बढ़े बेरोजगार…रोजगार कार्यालय में बाहरी राज्यों के उम्मीदवार भी पंजीयन करा रहे हैं। 2014 से रोजगार पंजीयन की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई। ऐसे में बाहरी उम्मीदवार अपने को मप्र के किसी भी जिले का रहवासी बताकर पंजीयन करा लेता है। इसमें मार्कशीट, मूल निवासी आदि दस्तावेज अपलोड करने की शर्त भी नहीं है।

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