मोदी ने कहा- फेसलेस असेसमेंट और टैक्सपेयर्स चार्टर आज से लागू, फेसलेस अपील 25 सितंबर से; टैक्सपेयर्स को डरने की जरूरत नहीं

  • मोदी ने कहा- इनकम टैक्स सिस्टम को फेसलेस, सीमलेस और पेनलेस बनाने की कोशिश
  • टैक्सपेयर्स चार्टर का मकसद करदाताओं की दिक्कतें कम करना, अफसरों की जवाबदेही तय करना

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को देश के ईमानदार करदाताओं के लिए नया प्लेटफॉर्म ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन, ऑनरिंग द ऑनेस्ट (पारदर्शी कराधान-ईमानदार का सम्मान) लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि इसमें फेसलेस एसेसमेंट, फेसलेस अपील और टैक्सपेयर चार्टर जैसे 3 बड़े रिफॉर्म्स शामिल हैं। फेसलेस एसेसमेंट और टैक्सपेयर चार्टर आज से ही लागू हो गए हैं। फेसलेस अपील 25 सितंबर यानी दीनदयाल उपाध्याय जन्मदिवस से देशभर में लागू हो जाएगी।

मोदी के भाषण की अहम बातें

ईमानदार टैक्सपेयर की राष्ट्रनिर्माण में बड़ी भूमिका
मोदी ने कहा कि इस महत्वपूर्ण तोहफे के लिए टैक्सपेयर्स को बधाई देता हूं और इनकम टैक्स विभाग के अफसरों, कर्मचारियों को शुभकामनाएं देता हूं। बीते 6 साल में हमारा फोकस रहा है, बैंकिंग द अनबैंक, सिक्योरिंग द अनसिक्योर और फंडिंग द अनफंडेड। आज एक नई यात्रा शुरू हो रही है। ऑनरिंग द ऑनेस्ट, ईमानदार का सम्मान। देश का ईमानदार टैक्सपेयर राष्ट्रनिर्माण में बड़ी भूमिका निभाता है। वो आगे बढ़ता है तो देश भी आगे बढ़ता है।

पॉलिसी को पीपुल सेंट्रिक बनाने पर जोर
मोदी ने बताया कि आज से शुरू हो रहीं नई सुविधाएं देशवासियों के जीवन से सरकार के दखल को कम करने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। आज हर नियम कानून को, हर पॉलिसी को प्रोसेस और पावर सेंट्रिक एप्रोच से निकालकर उसे पीपुल सेंट्रिक और पब्लिक फ्रेंडली बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके सुखद परिणाम भी देश को मिल रहे हैं। आज हर किसी को ये अहसास हुआ है कि शॉर्ट कट ठीक नहीं है।

बदलाव की 4 वजह
प्रधानमंत्री ने कहा कि सवाल ये है कि बदलाव कैसे आ रहा है? मोटे तौर पर कहूं तो इसके 4 कारण हैं-

  • पहला- पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस।
  • दूसरा- सामान्य जन की ईमानदारी पर विश्वास।
  • तीसरा- सरकारी सिस्टम में ह्यूमन इंटरफेस को कम कर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल।
  • चौथा- सरकारी मशीनरी में एफिशिएंसी, इंटीग्रिटी और सेंस्टिविटी के गुण को रिवॉर्ड किया जा रहा है।

1500 से ज्यादा कानून खत्म
मोदी ने कहा कि एक दौर था जब रिफॉर्म की बड़ी बातें होती थीं, दबाव में लिए गए फैसलों को भी रिफॉर्म कह दिया जाता था। अब ये सोच और अप्रोच बदल गई है। हमारे लिए रिफॉर्म का मतलब है कि ये नीति आधारित हों, टुकड़ों में नहीं हों और एक रिफॉर्म दूसरे रिफॉर्म का आधार बने। ऐसा भी नहीं है कि हम एक बार रिफॉर्म करके रुक गए। बीते कुछ सालों में 1500 से ज्यादा कानूनों को खत्म किया गया है। ईज ऑफ डूइंग में कुछ साल पहले भारत 134 वें नंबर पर था, अब 63वें नंबर पर है। इसके पीछे कई रिफॉर्म्स हैं।

विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ा
प्रधानमंत्री के मुताबिक देश में विदेशी निवेशकों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। कोरोना काल में भी भारत में रिकॉर्ड एफडीआई आना इसी का उदाहरण है। भारत के टैक्स सिस्टम में फंडामेंटल रिफॉर्म की जरूरत इसलिए थी, क्योंकि ये गुलामी के कालखंड में बना और धीरे धीरे इवॉल्व हुआ। आजादी के बाद छोटे-छोटे बदलाव हुए लेकिन ढांचा वही रहा। नतीजा यह रहा कि ईमानदार टैक्सपेयर्स को भी कटघरे में खड़ा किया जाने लगा।

कुछ लोगों की वजह से ज्यादातर को परेशानी हुई
मोदी ने कहा कि कुछ मुट्ठीभर लोगों की पहचान के लिए बहुत से लोगों को बेवजह परेशानी से गुजरना पड़ा। टैक्सपेयर्स की संख्या में बढ़ोतरी होनी चाहिए थी, लेकिन गठजोड़ की व्यवस्था ने ईमानदारी से व्यापार करने वालों को, युवा शक्ति की उम्मीदों को कुचलने का काम किया। जहां कॉम्प्लेक्सिबिटी होती है वहां, कम्प्लायंस भी बहुत कम होता है।

रिटर्न से लेकर रिफंड तक की व्यवस्था आसान
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब दर्जनों टैक्स की जगह जीएसटी आ गया है। रिटर्न से लेकर रिफंड तक की व्यवस्था को आसान किया गया है। पहले 10 लाख रुपए से ऊपर के टैक्स विवादों में सरकार हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाती थी। अब हाईकोर्ट में 1 करोड़ और सुप्रीम कोर्ट में 2 करोड़ रुपए तक के मामलों की सीमा तय की गई है। कम समय में ही करीब 3 लाख विवादों को सुलझाया जा चुका है। 5 लाख रुपए की आय पर अब टैक्स जीरो है। बाकी स्लैब पर भी कम हुआ है। कॉर्पोरेट टैक्स के मामले में भारत दुनिया के सबसे कम टैक्स लेने वाले देशों में से एक है।

टैक्स रिटर्न भरने वाले बढ़े, पर 130 करोड़ की आबादी में टैक्सपेयर काफी कम
मोदी ने बताया कि 2012-13 में जितने रिटर्न फाइल होते थे, उनमें से 0.94% की स्क्रूटनी होती थी। 2018-19 में ये घटकर 0.26% पर आ गई। यानी स्क्रूटनी चार गुना कम हुई है। रिटर्न भरने वालों की संख्या में बीते 6-7 सालों में करीब 2.5 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन, इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि 130 करोड़ लोगों के देश में टैक्स भरने वालों की संख्या बहुत कम है। सिर्फ 1.5 करोड़ साथी ही इनकम टैक्स जमा करते हैं। आपसे अपील करूंगा कि इस पर हम सब को चिंतन करने की जरूरत है। ये आत्मनिर्भर भारत के लिए जरूरी है।

क्या है टैक्सपेयर्स चार्टर?
चार्टर्ड अकाउंटेंट कीर्ति जोशी के मुताबिक टैक्सपेयर्स चार्टर का मकसद करदाताओं और इनकम टैक्स विभाग के बीच विश्वास बढ़ाना, टैक्सपेयर्स की परेशानी कम करना और अफसरों की जवाबदेही तय करना होता है। इस समय दुनिया के सिर्फ तीन देशों- अमेरिका, कनाडा और आस्ट्रेलिया में ही यह लागू है। इन तीनों देशों के टैक्सपेयर्स चार्टर में 3 प्रमुख बातें शामिल हैं-

1. करदाता को ईमानदार मानना
जब तक यह साबित न हो जाए कि करदाता ने टैक्स चोरी या गड़बड़ी की है, तब तक उसे ईमानदार करदाता मानते हुए उन्हें सम्मान देना।
2. समय पर सेवा
करदाताओं की समस्याओं का जल्द समाधान करना। अगर किसी समस्या का तुरंत समाधान संभव न हो तो तय टाइम लाइन में सॉल्यूशन की व्यवस्था करना।
3. आदेश से पहले स्क्रूटनी
करदाताओं के खिलाफ आदेश जारी करने से पहले उन्हें स्क्रूटनी करने का मौका देना, जिससे गलत आदेश जारी नहीं हो।

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