डायरेक्ट आईएएस होने के बाद भी कलेक्टर नहीं बनने दिया

  • जातिवादी सोच के कारण मुझ पर 25 केस ठोक दिए गए। मुझे न्यायालय से दोषमुक्त किया गया

भोपाल। आईएएस अफसर रमेश थेटे का दर्द अपने रिटायरमेंट के दिन छलक गया। शुक्रवार को अपने कार्यकाल के अंतिम दिन उन्होंने मीडिया को पत्र लिखकर यह दर्द बयां किया। इसमें उन्होंने डायरेक्ट आईएएस अफसर होने के बावजूद कलेक्टर नहीं बन पाने का जिक्र किया।
उन्होंने यह भी लिखा कि प्रमुख सचिव पद पर पदोन्नति के लिए उपयुक्त होने के बावजूद निर्णय को बंद लिफाफे में रखकर मुझे न्याय से वंचित किया गया। जातिवादी सोच के कारण मुझ पर 25 केस ठोक दिए गए। मुझे न्यायालय से दोषमुक्त किया गया, तो अपेक्स बैंक का कर्ज मय ब्याज के चुकाने के बावजूद मेरी पत्नी पर केस ठोक दिया और मुझे सहआरोपी बनाकर यह सुनिश्चित किया गया कि पदोन्नति न मिले। अंत में उन्होंने लिखा कि अब मैं गुलामी से मुक्त हो गया हूं। सो रोल, कैमरा एंड एक्शन। थेटे ने 25 जुलाई को सीएम शिवराज सिंह चौहान को भी पत्र लिखकर उन्हें पीएस पद पर पदोन्नति का आदेश करने का आग्रह किया था। रिटायरमेंट के बाद थेटे फिल्म निर्माण क्षेत्र में कूद गए हैं। वे फिल्म ‘द बेटल ऑफ भीमा कोरेगांव’ का डायरेक्शन करेंगे। फिल्म में प्रसिद्ध अभिनेता अर्जुन रामपाल लीड रोल में हैं। थेटे ने बताया कि वे किसी राजनीतिक पार्टी में नहीं जाएंगे। उनकी रुचि गीत-संगीत व डायरेक्शन में है। वे इसी क्षेत्र में काम करेंगे।

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