बोर्ड परीक्षा से लेकर कॉलेज एजुकेशन तक, जानें नई शिक्षा नीति में क्या-क्या बदला

नई दिल्ली. नई शिक्षा नीति को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है. इसकी औपचारिक घोषणा कर दी है.  इस नई शिक्षा नीति के तहत अब से मानव संसाधन विकास मंत्रालय को शिक्षा मंत्रालय कहा जाएगा. इस नई नीति के तहत तमाम नई चीजें लागू की जाएंगी. इस नई शिक्षा नीति को कुछ इस तरह से बनाया गया है कि यह 21 वीं सदी के उद्देश्यों को पूरा करे साथ ही भारत की परंपराओं और वैल्यू सिस्टम से भी सुसंगत हो. इसको भारत के एजुकेशन स्ट्रक्चर के सभी पहलुओं को ध्यान में रख के बनाया गया है.

आइए जानते हैं 34 साल बाद आई नई शिक्षा नीति में क्या-क्या बदल गया:-

  • नई शिक्षा नीति के तहत दुनिया की 100 बड़ी यूनिवर्सिटीज को भारत में स्थापित किए जाने की सुविधा दी जाएगी.
  • 2040 सभी हायर एजुकेशन इन्स्टीट्यूट्स को मल्टी डिसिप्लिनरी इन्स्टीट्यूशन में बदला जाएगा और कोशिश की जाएगी कि तीन हज़ार या उससे ज्यादा छात्र हों.
  • सभी हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट के लिए एनटीए द्वारा संयुक्त प्रवेश परीक्षा करवाई जाएगी. हालांकि, यह प्रवेश परीक्षा वैकल्पिक होगी न कि अऩिवार्य.
  • बोर्ड परीक्षा को लेकर होंगे बड़े बदलाव. बोर्ड परीक्षा को इस प्रकार से बनाया जाएगा कि इसमें छात्र के वास्तविक ज्ञान पता चल सके न कि सिर्फ रट लेने की शक्ति का.
  • कई स्तरों पर कोर्स में प्रवेश करने और बाहर निकलने की सुविधा होगी. एमफिल को खत्म किया जाएगा. रिसर्च करने के लिए एमफिल की अनुमति नहीं होगी.
  • सरकारी के साथ साथ प्राइवेट शैक्षणिक संस्थानों में भी फीस को रेग्युलेट किया जाएगा. ताकि कोई भी संस्थान एक्स्ट्रा फीस न चार्ज कर सके.
  • शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी का 6 फीसदी तक निवेश किया जाएगा. अभी तक राज्य और केंद्र को मिलाकर करीब 4.4 फीसदी होता है.
  • छात्र छठीं कक्षा से ही कोडिंग सीख पाएंगे. मैथमेटिकल थिंकिंग और साइंटिफिक टेंपर को बढ़ावा दिया जाएगा.
  • क्षेत्रीय भाषाओं में भी ई-कंटेंट को उपलब्ध कराया जाएगा. टेक्नॉलजी को एजुकेशन प्लानिंग, टीचिंग, लर्निंग और असेसमेंट का हिस्सा बनाया जाएगा. इसकी शुरुआत 8 बड़ी क्षेत्रीय भाषाओं से की जाएगी.
  • अंडर ग्रेजुएट कॉलेजों को और ज्यादा ऑटोनॉमस बनाया जाएगा.

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