कालीसिंध प्रोजेक्ट पर दोनों पार्टियों ने झोंकी ताकत

शाजापुर। इस लोकसभा चुनाव में देवास सीट पर पानी बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। संसदीय क्षेत्र के तीनों प्रमुख जिले शाजापुर, देवास व आगर जलसंकट से जूझ रहे हैं, जबकि सीहोर जिले के आष्टा में भी यही समस्या है। मैदान में उतरे प्रत्याशी भी अब जैसे ही जनता के बीच पहुंचते हैं तो उन्हें भी शिकायत के रूप में जलसंकट समस्या सबसे ज्यादा मिल रही है। ऐसे में भाजपा-कांग्रेस को 3489 करोड़ रुपए लागत के नर्मदा-कालीसिंध लिंक प्रोजेक्ट से बड़ी उम्मीदें हैं। ये प्रोजेक्ट उनकी नैया पार लगा दे, इसलिए दोनों ही पार्टी के नेताओं ने अपनी ताकत इसे भुनाने में झोंक दी है।
भाजपा प्रोजेक्ट की मंजूरी के नाम पर और कांग्रेस इसे शुरू कराने के नाम पर वोट मांग रही है। नेता जानते हैं कि यदि पानी का ये मुद्दा भुना लिया तो न सिर्फ देवास बल्कि राजगढ़ सीट पर भी फायदा मिल सकता है। शाजापुर, देवास, सीहोर व राजगढ़ जिले के 366 से अधिक गांवों को प्रोजेक्ट से फायदा पहुंचेगा। देवास जिले के सोनकच्छ के पास से निकली कालीसिंध नदी लगभग पूरे लोकसभा क्षेत्र को कवर करती है। वहीं राजगढ़ जिले का बड़ा हिस्सा भी इसमें शामिल हैं। कालीसिंध में नर्मदा का पानी लाने के लिए तत्कालीन शिवराज सरकार ने अक्टूबर-17 में प्रोजेक्ट बनाया था लेकिन वह शुरुआत नहीं कर पाई थी। जिसका फायदा प्रदेश में कमलनाथ सरकार ने उठा लिया।
25 फरवरी 2019 को भूमिपूजन करके लोकसभा चुनाव में भुनाने की शुरुआत कर दी। तभी से कांग्रेसी मैदान में उतरकर जनता के बीच प्रोजेक्ट को भुना रहे हैं। चुनाव में यह प्रक्रिया तेज हो गई है। दूसरी ओर भाजपा भी पीछे नहीं है। भाजपा प्रोजेक्ट की मंजूरी को लेकर वोट मांग रही है। दोनों पार्टी के नेताओं का उन क्षेत्रों में फोकस है, जहां से कालीसिंध गुजरी है। 366 गांवों के साथ सोनकच्छ, सारंगपुर, कालीसिंध, सुंदरसी जैसे बड़े नगर या गांव भी नदी कि नारे ही बसे हैं। प्रोजेक्ट के तहत कालीसिंध नदी को नर्मदा से जोड़ना है। स्टापडेम बनाकर पानी को भरकर रखा जा सके गा। ताकि सालभर नदी में पानी रहे और सिंचाई व पीने के लिए पानी मिल सके।
विस चुनाव में फायदा नहीं उठा पाई थी भाजपा
कालीसिंध नदी जिस क्षेत्र से निकली है, वह सोनकच्छ विधानसभा में आता है जबकि शाजापुर व शुजालपुर क्षेत्र से भी नदी गुजरी है। वर्तमान में तीन में से दो सीटें कांग्रेस के कब्जे में है। शुजालपुर पर भाजपा का कब्जा है। विधानसभा चुनाव से पूर्व तीनों ही सीटों पर भाजपा का कब्जा था। समझा जा रहा था कि विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा इस प्रोजेक्ट के लिए भूमिपूजन कर देगी लेकि न ऐसा नहीं हो सका और भाजपा को चुनाव में इसका फायदा नहीं मिल सका। दूसरी ओर कांग्रेस ने प्रोजेक्ट को लोकसभा चुनाव में भुनाने के लिए 25 फरवरी को भूमिपूजन कर दिया। कांग्रेसी प्रोजेक्ट को जल्द पूरा करने का दावा करके वोट मांग रहे हैं।

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