चीन से विवाद पर मंथन होगा और अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की योजना पर चर्चा की जाएगी

  • केरवा डेम स्थित शारदा विहार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख प्रचारकों की बैठक शुरू हो गई
  • संघ प्रमुख मोहन मोहन भागवत पांच दिन के दौर पर भोपाल आए हैं, वे यहां मीटिंग लेंगे

भोपाल। आरएसएस प्रमुख माेहन भागवत भोपाल में हैं। वे यहां पांच दिन रहेंगे। मंगलवार को राजधानी के केरवा डेम स्थित शारदा विहार में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख प्रचारकों की बैठक शुरू हो गई। इस बैठक में चीन से विवाद और अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण की रूपरेखा पर विचार होगा। इसके साथ 5 अगस्त को राम मंदिर शिलान्यास के दिन पूरे देश में दिवाली जैसा उत्सव मनाने पर विचार होगा।

हर साल अप्रैल-मई माह में होने वाली ये सालाना बैठक कोरोना संकट के कारण तय समय पर टाल दी गई थी। भागवत लंबे समय बाद आरएसएस के आनुसांगिक संगठनों के प्रमुखों से मिलने वाले हैं। बैठक में वे लोग शामिल हो रहे हैं, जिन्हें संघ का नीति निर्धारक माना जाता है। ऐसे पदाधिकारियों की संख्या लगभग 20 है। खबर है कि बैठक के अंतिम दिन भाजपा के कुछ राष्ट्रीय पदाधिकारी शामिल हो सकते हैं।

तीन दिनों तक मंथन चलेगा
खास बात यह है कि बैठक ऐसे समय होने जा रही है, जबकि कुछ दिन बाद ही राम मंदिर का शिलान्यास होने जा रहा है। मंथन का काम फिलहाल तीन दिनों तक चलने वाला है। इस बैठक के पहले संघ पदाधिकारी वीडियो कॉफ्रेंसिंग के जरिए विचार-विमर्श कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि बैठक में अयोध्या राम मंदिर निर्माण को यादगार बनाने के लिए विचार-विमर्श कर रणनीति तैयार की जाएगी। दरअसल, 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर के लिए भूमिपूजन करने जा रहे हैं। इसके लिए समिति द्वारा उन्हें आंमत्रण दिया जा चुका है। शिलान्यास के दिन पूरे देश में उत्सव मनाया जाए, इस बात का निर्णय भी बैठक में लिया जाएगा।

जनता के मूड पर भी होगी चर्चा
बैठक में संघ पदाधिकारी चीन विवाद पर न केवल चर्चा करेंगे, बल्कि इस मसले पर देश की जनता के मूड पर भी मंथन करेंगे। बताया जा रहा है भारत-चीन विवाद को लेकर संघ को जो फीडबैक मिला है वह सरकार के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। हालांकि इस मामले में संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों की मोदी मंत्रिमंडल के प्रमुख मंत्रियों के साथ चर्चा हो चुकी है। 

हर साल बैठक होती है
दरअसल, संघ अपनी कार्यपद्धति के हिसाब से हर साल इस तरह की बैठक करता है। इसमें कार्यपद्धति में सुधार की गुंजाइश भी तलाशी जाती है। संघ की दृष्टि से इस बैठक को इसलिए भी अतिमहत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके पहले होने वाली प्रतिनिधि सभा और कार्यकारिणी की बैठक कोरोना महामारी की वजह से नहीं हो सकी है। यही नहीं, इस महामारी की वजह से संघ के प्रवास, साप्ताहिक मिलन और राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भी नहीं हो सके हैं। 

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