कोई भी खिलाफ हो, सितंबर के अंतिम हफ्ते में बुलाना होगा विधानसभा का सत्र

  • अनुच्छेद 174- विस के दो सत्रों के बीच नहीं होना चाहिए 6 माह का गैप

भोपाल। कोरोना महामारी के दौर में ही सरकार को सितंबर के अंतिम सप्ताह (25 सितंबर) में विधानसभा का सत्र बुलाना होगा। उस दौरान चाहे भाजपा और कांग्रेस ही सत्र बुलाए जाने के खिलाफ क्यों न हों। दरअसल, संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत विधानसभा के दो सत्रों के बीच 6 महीने का गैप नहीं होना चाहिए, यदि यह अंतर होता है तो सरकार पर संवैधानिक संकट खड़ा हो जाएगा।

मप्र विधानसभा का पिछला सत्र 25 मार्च को स्थगित हुआ था। इस लिहाज से अगले 6 महीने 25 सितंबर को हो रहे हैं। मौजूदा विधानसभा सत्र जो सोमवार से होना था, स्थगित कर दिया है। सरकार ने विधि विभाग से इसे सत्र मानने के बारे में राय मांगी थी, जिससे उसने इंकार कर दिया है। अगला सत्र वर्चुअल प्लेटफॉर्म के जरिए बुलाए जाने पर विचार किया जा रहा है, जिसमें सदन की कार्रवाई में सदस्य भाग न लें और अपनी बात कह सकें। विस के पीएस एपी सिंह का कहना है कि अगला सत्र बुलाए जाने के पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जाएगा। 

संविधान से चलता है शासन  
कार्यपालिका पर विधायिका का अंकुश जरूरी है। इसके लिए आर्टिकल 174 में स्पष्ट प्रावधान है कि विधानसभा के दो सत्रों में 6 महीने से ज्यादा का अंतर नहीं होना चाहिए। सत्ताधारी या विपक्ष सहमति से सत्र टालने पर फैसला नहीं ले सकते। 
विवेक तन्खा, सांसद व वरिष्ठ अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट

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