असमंजस में भाजपा, नए चेहरों को कैसे लाएं आगे?

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा की नई टीम के गठन की कवायद जारी है। पांच साल बाद गठित हो रही भाजपा पदाधिकारियों की इस टीम में शामिल होने के लिए विधायक और खासतौर से वे दावेदार दबाव बना रहे हैं जो शिवराज कैबिनेट में मंत्री नहीं बन पाए। इन सब दबाव के चलते पार्टी असमंजस में है कि विधायकों को पदाधिकारी बनाया गया तो वह संगठन के लिए कितना समय दे पाएंगे।
ऐसे हालात में पार्टी के सामने बड़ी चुनौती यह है कि वह नए चेहरों को कैसे आगे लाए? शिवराज मंत्रिमंडल के विस्तार के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा भी अपनी टीम बनाने की कवायद में जुट गए हैं। पिछले तीन दिन से चल रहे मंथन के बाद पार्टी ने प्राथमिक सूची तो तैयार कर ली है, लेकिन असमंजस यह है कि विधायक-सांसदों को पार्टी पदाधिकारी बनाया जाए या नहीं।
यदि संगठन में इन्हें पदाधिकारी बनाया गया तो वे अपने विधानसभा क्षेत्र के अलावा प्रदेश में प्रवास कर पाएंगे भी या नहीं। पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन में विधायकों को शामिल करने का पिछला अनुभव ठीक नहीं रहा है। पहले जिन विधायकों को संगठन का दायित्व सौंपा गया था, वे पूरे प्रदेश में प्रवास तो दूर संगठन की बैठकों में तक शामिल होने के लिए भोपाल नहीं आते थे। ऐसे हालात में पार्टी चाहती है कि विधायकों और सांसदों को संगठन की गतिविधियों से दूर ही रखा जाए।
इसकी वजह यह भी है कि विधायक और सांसद ज्यादातर समय या तो राजधानी या अपने क्षेत्र में देते हैं। जब चुनाव नजदीक आता है तो वे राजधानी आना भी छोड़ देते हैं। यही वजह है कि जब संगठन की गतिविधियों के लिए उन्हें अन्य जिलों में प्रवास पर भेजा जाता है तो वे नहीं जाते हैं। पार्टी नेताओं का यह भी कहना है कि अगले चुनाव के लिए भी अब बहुत कम समय बचा है। अगले चार-छह महीने कोरोना के दौर के छोड़ दिए जाएं तो मात्र दो साल विधायकों के पास बचते हैं।
अंतिम साल में चुनावी तैयारी के लिए मैदान में उतरना ही पड़ता है। हालांकि पार्टी के दिग्गज नेता इस मामले में अब तक किसी भी निर्णय पर नहीं पहुंचे हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक, एक-दो दिन में इस बारे में अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने किया मंथन दूसरा संकट प्रदेश कार्यकारिणी के गठन में नए चेहरों को आगे लाने का है।
पार्टी ने अब तक लंबी कवायद की है कि संगठन में युवाओं को आगे लाया जाए। यही वजह है कि मंडल से लेकर जिला अध्यक्ष के चुनाव में पार्टी ने आयु सीमा निश्चित कर दी थी ताकि पीढ़ी परिवर्तन का लक्ष्य हासिल किया जा सके। पार्टी ने 35 साल से कम उम्र के मंडल अध्यक्ष बनाए हैं और 50 साल अधिकतम आयु सीमा वाले लोगों को ही जिला अध्यक्ष बनाया गया है।
संगठन चाहता है कि प्रदेश पदाधिकारियों की टीम में भी नए और युवा चेहरे ज्यादा से ज्यादा शामिल किए जाएं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार को ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा और प्रदेश संगठन महामंत्री सुहास भगत ने प्रदेश पदाधिकारियों के चयन को लेकर मंथन किया। संभावना यह कि एक-दो दिन में अंतिम सूची हाईकमान को भेज दी जाए। हाईकमान की मंजूरी के ही बाद प्रदेश पदाधिकारियों की सूची जारी की जाएगी।
इनका कहना है
प्रदेश कार्यसमिति के गठन का अधिकार भाजपा के संविधान में प्रदेश अध्यक्ष को है। परंपरा के तहत वे केंद्रीय नेतृत्व और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर निर्णय लेते हैं। राजनीतिक परिस्थिति और संगठन की भावी योजना भी दृष्टिगत रहती है।
रजनीश अग्रवाल प्रवक्ता, भाजपा मप्र

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