5 विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने से कांग्रेस में हड़कंप, विधानसभा सत्र के दौरान ‘बदलापुर’ पूरा हो सकता है

  • कांग्रेस ने पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, एनपी प्रजापति और बाला बच्चन को विधायकों को साधने की जिम्मेदारी
  • 2019 में मानसून सत्र के दौरान भाजपा के दो विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने पाला बदला था

भोपाल। मध्य प्रदेश में 20 जुलाई से विधानसभा सत्र शुरू हो रहे है। इस दौरान कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है। कांग्रेस के 5 विधायक भाजपा के संपर्क में होने की खबरें आ रही हैं। करीब चार महीने पहले सत्ता में आई भाजपा का यह ‘बदलापुर’ प्लान माना जा रहा है। दरअसल, पिछले साल मानसून सत्र में कानून संबंधी एक विधेयक में मत विभाजन के दौरान भाजपा के दो विधायक नारायण त्रिपाठी और शरद कौल ने कांग्रेस सरकार के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद दोनों ही विधायकों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के साथ विधानसभा में एक पत्रकार वार्ता में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तत्कालीन सरकार पर कई गंभीर आरोप भी लगाए थे।

विधानसभा में हुए अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद भाजपा के अंदर भोपाल से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया था। दोनों विधायक भाजपा और शिवराज सिंह के विरोधी में कई बार बयान देते रहे। इसी साल मार्च में हुए प्रदेश के सियासी ड्रामे में नारायण त्रिपाठी खुलकर कमलनाथ के साथ खड़े नजर आए और उन्होंने कांग्रेस सरकार के पक्ष में बयान दिए। लेकिन शरद कौल थोड़ा पीछे ही रहे। कमलनाथ सरकार के गिरने के साथ दोनों विधायकों के सुर भी बदल गए और अब दोनों शांत और भाजपा के साथ हैं।

मानसून सत्र में बदल सकते हैं पाला

मानसून सत्र में हुए घटनाक्रम को भाजपा अभी तक पचा नहीं पाई है। सत्र से 10 दिन पहले कांग्रेस के छतरपुर जिले की बड़ामलहरा सीट से विधायक प्रद्युम्न लोधी ने कांग्रेस और विधायकी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया। अब कुछ दिन से प्रदेश की राजनीति में ये हलचल है कि कांग्रेस के पांच विधायक विधानसभा सत्र के दौरान बड़ा झटका दे सकते हैं। इनके भाजपा में शामिल हाेने का दावा किया जा रहा है। इनमें बुंदेलखंड से 4 और महाकौशल से 1 विधायक भाजपा के संपर्क में होने की खबरें हैं। इसी को देखते हुए कांग्रेस ने इन विधायकों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। मंगलवार को दमोह से विधायक राहुल सिंह और बंडा विधायक तरबर सिंह के भाजपा में जाने की अटकलें तेज हुईं तो पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दोनों विधायकों को घर बुलाकर एक घंटे बातचीत की।

कमलनाथ ने वरिष्ठ विधायकों को जिम्मेदारी दी

कमलनाथ ने पार्टी के विधायकों को साधने की जिम्मेदारी पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा और बाला बच्चन समेत पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति को सौंपी है। कांग्रेस के बुंदेलखंड और महाकौशल अंचल से आने वाले पांच विधायकों के भाजपा के संपर्क में होने से पार्टी में हड़कंप मचा है। तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान भी पहली बार चुनकर आए 30 विधायकों ने अलग से बैठक कर राय जाहिर की थी कि उन्हें सत्ता और संगठन में बैठे महत्वपूर्ण लोग मिलने का समय नहीं देते। हालांकि इन विधायकों में 8 भाजपा में चले गए हैं।

यह भी… नाथ के इस्तीफे पर फूट-फूटकर रोए थे प्रद्युम्न
दो दिन पहले कांग्रेस और अपनी विधायकी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए प्रद्युम्न सिंह लोधी मार्च में कमलनाथ के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के समय फूट-फूट कर रोए थे। प्रद्युम्न और राहुल दोनों चचेरे भाई हैं और हिंडोलिया में एक ही परिवार से हैं। तरबर भी इनके रिश्तेदार हैं। पिछले दो महीने तीनों विधायकों ने सुरखी विधानसभा में ब्लाॅक स्तर पर कई बैठकें लीं। अब इनमें से प्रद्युम्न भाजपा में शामिल हो चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में तरबर को टिकट दिलाने में राजस्व एवं परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की भी अहम भूमिका रही है।

कांग्रेस विधायक ने कहा 
इधर, दमोह से विधायक राहुल सिंह और बंडा विधायक तरबर सिंह ने बुधवार को फिर से दोहराया कि उनकी आस्था कांग्रेस पार्टी में है और वे आगे का रास्ता भी कांग्रेस में तय करेंगे। बड़ामलहरा से विधायक रहे प्रद्युम्न सिंह के कांग्रेस छोड़ने के तत्काल बाद भाजपा ने खाद्य नागरिक आपूर्ति जैसे निगम का अध्यक्ष बनाकर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया था।

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