एकेडमिक तनाव कम होगा, पर कंसेप्ट क्लेरिटी पर पड़ सकता है असर

  • एक्सपर्ट्स के मुताबिक- इंप्लीमेंटेशन बड़ा इश्यू; लगातार स्क्रीन के सामने बैठाने से बच्चों की आंखों पर पड़ सकता है असर
  • टीचर्स की राय- जो सिलेबस हटाया गया, उसकी रेलेवेंसी जरूर चेक की जानी चाहिए, ताकि वो किसी चैप्टर से कनेक्ट न हो

सीबीएसई ने 9वीं से 12वीं कक्षा तक का सिलेबस 30% घटा दिया है। ऐसा कोरोना महामारी से बच्चों की पढ़ाई पर हुए असर और कक्षाओं के समय में आई कमी के कारण किया गया है। हालांकि, यह कटौती सिर्फ 2020-21 सत्र के लिए ही लागू रहेगी। 

एक्सपर्ट्स की राय- पूरे सिलेबस में सुधार का यह सही वक्त

  • एनसीईआरटी के पूर्व डायरेक्टर जेएस राजपूत कहते हैं कि सिलेबस को सिर्फ एक सेशन के लिए कम किए जाने की जगह यह सही वक्त है पूरे सिलेबस में बेसिक सुधार किया जाए।
  • ग्वालियर ग्लोरी हाईस्कूल की प्रिसिंपल राजेश्वरी सावंत का कहना है कि जो सिलेबस हटाया जा रहा है, उसकी रेलेवेंसी जरूर चेक की जानी चाहिए। यानी जिस क्लास का कोई टॉपिक हटाया गया हो वो अगली क्लास के किसी चेप्टर के साथ कनेक्ट नहीं होना चाहिए। 
  • करिअर काउंसलर और सीबीएसई हेल्पलाइन काउंसलर डॉ.गीतांजलि कुमार मानती हैं कि बच्चों के एकेडमिक फ्यूचर से जुड़े सभी सवालों को तत्काल एड्रेस किया जाना चाहिए। 
  • डीपीएस भोपाल के कॉमर्सटीचर अजयकुमार दास का मानना है कि कुछ घटाया गया सिलेबस टॉपिक्स को कवर करने में बड़ी मदद करेगा। वहीं, सागर पब्लिक स्कूल की स्टूडेंस आरुषा चौहान की चिंता है कि लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने से आंखे पर गंभीर असर तो नहीं पड़ेगा।  

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