सिंधिया नहीं, ‘रेड्डी फॉर्म्युला’ से बिना BJP की मदद के कांग्रेस से हिसाब चुकाएंगे पायलट?

जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की बगावत के बाद राजनीतिक हलकों में बस एक ही चर्चा है कि आगे क्या होगा। सीएम अशोक गहलोत ने जिस तरह से 100 ज्यादा विधायकों की प्रस्तुति मीडिया के सामने करा दी है उससे तो यही लगता है कि वर्चस्व की जंग में पायलट पहली बाजी हार गए हैं। लेकिन इस सवाल का जवाब अब तक नहीं मिल पाया है कि आखिर पायलट का अगला कदम क्या होगा। पहली नजर में लग रहा था कि पायलट अपने दोस्त ज्योतिरादित्य सिंधिया की राह पर निकलेंगे। बुधवार को न्यूज एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू से साफ हो गया है कि पायलट अगले सिंधिया नहीं बनने जा रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि जिस बीजेपी की खिलाफत कर उन्होंने पूरी राजनीति की है भला उसके साथ कैसे खड़े हो सकते हैं।
पूरे प्रकरण में बीजेपी के कुछ नेता जिस तरह से पायलट के प्रति सहानुभूति प्रकट करते हुए बयान जारी कर रहे हैं उससे जनता के मन में असमंजस थी कि क्या पायलट मोदी-शाह के नेतृत्व को नमन करने का मन बना चुके हैं। इंटरव्यू में पायलट ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राजनीतिक गहमागहमी के बीच बीजेपी के किसी बड़े नेता से उनकी कोई बात या मुलाकात या बात नहीं हुई है। पायलट की कही इन बातों के बाद राजनीतिक सस्पेंस और ज्यादा बढ़ गया है।
राजनीति की पाठशाला में कहा जाता है कि जब भी असमंजस के हालात बने तो इतिहास के पन्ने पलटने चाहिए। पीछे की घटनाओं से आगे का अनुमान लगाया जा सकता है। इस लिहाज से पिछले दो दशक की भारतीय राजनीति पर गौर करें तो जगन मोहन रेड्डी का एक ऐसा मामला जेहन में आता है जिससे सचिन पायलट के भविष्य को लेकर अनुमान लगाया जा सकता है।
कौन हैं जगन मोहन रेड्डी, पायलट क्यों चल सकते हैं उनकी राह?
जगन मोहन रेड्डी इस वक्त आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इनके बारे में जानने समझने के लिए हम आपकी यादददाश्त को थोड़ा पीछे ले जाते हैं। साल 2009 सितंबर में आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई एस राजशेखर रेड्डी का एक हवाई दुर्घटना में निधन हो गया था। उस वक्त जगन ने कांग्रेस नेतृत्व के सामने डिमांड रखी थी कि उन्हें पिता की विरासत मिले और सीएम की कुर्सी पर बिठाया जाए। लेकिन कांग्रेस की राज्य ईकाई और केंद्रीय आलाकमान ने जगन को ज्यादा लोड नहीं लिया।
जब जगन ने बगावत और विरोध के सुर तेज किए तो कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद जगन मोहन रेड्डी ने करीब 2 साल तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों का दौरा किया। फिर 12 मार्च 2011 को वाईएसआर कांग्रेस की स्थापना की। कुल मिलाकर जगन मोहन रेड्डी ने करीब 10 साल जनता के साथ खड़े रहकर संघर्ष किया। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत के साथ आंध्र प्रदेश की सत्ता पर काबित हुए।
पायलट और रेड्डी में समानता
इन सारी बातों के बीच एक सवाल यह है कि आखिर सचिन पायलट और जगन मोहन रेड्डी की तुलना किस आधार पर की जाए। जगन मोहन रेड्डी और सचिन पायलट दोनों जुझारू किस्म के नेता हैं। जगन ने जब कांग्रेस से बगावत की थी तब किसी ने उनके संघर्ष की क्षमता को नहीं देखा था, लेकिन पिछले 10 साल में उन्होंने साबित कर दिया है कि संघर्ष का दूसरा नाम जगन मोहन रेड्डी हैं।\
दूसरी तरफ सचिन पायलट गुर्जर समाज से आते हैं। यह समाज अपने जुझारूपन के लिए जाना जाता है। यह पायलट के अंदर भी दिखती है। पायलट करीब साढ़े छह साल राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे। वे करीब पांच साल तक कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर खड़े दिखे। मीडिया और सोशल मीडिया में तमाम ऐसी तस्वीरें और खबरें हैं जिसमें सचिन पायलट के बीजेपी की वसुधंरा राजे सरकार में लाठी खाने की बातें हैं।
सचिन पायलट और उनके समर्थक मानते हैं कि इसी संघर्ष की वजह से राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता हासिल हुई है। लेकिन जब मुख्यमंत्री चुनने की बारी आई तो कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने अशोक गहलोत पर भरोसा जता दिया। राहुल गांधी के मान-मनौव्वल के बाद गहलोत को सीएम की कुर्सी पर देखने को पायलट तैयार हो गए थे। लेकिन इस समझौते के बाद दोनों नेता अलग-अलग दरवाजे से बाहर निकले थे। इस घटना से साफ हो गया था कि पायलट और गहलोत एक राह पर तो नहीं चलेंगे। जैसा अंदेशा था वह अब सामने है।
पायलट के हालिया बयान से साफ हो चुका है कि वह बीजेपी में नहीं जाएंगे और ना ही कांग्रेस में रहेंगे। इस लिहाज से पायलट के सामने अलग मोर्चा बनाने का ही विकल्प बचता है। शायद वह भी जगन मोहन रेड्डी की तरह दोबारा से संघर्ष शुरू करें और बीजेपी से दूरी बनाए रखते हुए कांग्रेस से अपना हिसाब चुकता कर पाएं।
सचिन पायलट जिस गुर्जर समाज से आते हैं उसकी आबादी राजस्थान में महज 7 फीसदी है। इतना तो पायलट भी समझते होंगे कि इतने कम वोट से कोई सत्ता तक कैसे पहुंच सकता है। इसलिए उन्हें समाज के और भी वर्ग का साथ जरूरी है। इस लिहाज से भी वे जगन का तरीका अख्तियार कर सकते हैं। जगन मोहन रेड्डी ने सामाजिक समीकरण बिठाने के लिए अपनी कैबिनेट में पांच उपमुख्यंत्री बनाए हैं। इस फैसले के जरिए वे अपना संदेश जनता के हर वर्ग को देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि ये सारी बातें अटकलें हैं, जब तक सचिन पायलट खुद सामने आकर पत्ते नहीं खोलते हैं तो तब तक अटकलों का बाजार गर्म रहेगा।

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