60% माता-पिता बच्चोंं को तभी स्कूल भेजना चाहेंगे, जब कोरोना वैक्सीन तैयार हो, 56% ने कहा- स्कूल खुले तो बच्चों को खुद ही स्कूल छोड़ेंगे

  • 53% ने कहा यदि स्कूल न खुलें, ऑनलाइन क्लास ही हो तो पूरे स्कूल के समय की तरह ही क्लासेज लगें
  • 45% बोले 9-12वीं तक खुलें स्कूल, शेष ऑनलाइन ही
  • 56% पैरेंट्स बोले, डिस्टेंसिंग वाले गेम हों, योग भी हो

भोपाल. कोरोना के चलते स्कूल/कॉलेज और कोचिंग संस्थान बंद हैं। ऐसे में पैरेंट्स की मंशा क्या है? वे बच्चों को कब स्कूल भेजना चाहते हैं? स्कूल खुलता है तो बच्चे जाएंगे कैसे? ऐसे तमाम सवालाें के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर ने 21 जून से 28 जून तक एक राष्ट्रव्यापी सर्वे किया।

इसमें मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, बिहार, झारखंड व दिल्ली के 73 हजार से ज्यादा पाठकों ने हिस्सा लिया। इनमें 55 हजार से ज्यादा पुरुष व 17 हजार से अधिक महिलाएं शामिल थीं। इनमें सर्वाधिक 24,352 लोग 36-45 वर्ष की आयुवर्ग के थे। जबकि 25-36 वर्ष के 16,909 और 46-55 वर्ष के 15,414 लोगों ने सर्वे में भाग लिया।

सर्वे के नतीजों के मुताबिक 60% लोगों ने कहा कि वे बच्चों को स्कूल तभी भेजना चाहेंगे जब कोरोना पूरी तरह खत्म हो जाएगा या इसकी वैक्सीन आ जाएगी। जबकि 71% लोगों का मानना है कि कोचिंग संस्थान, कॉलेज, यूनिवर्सिटी तभी खुलने चाहिए जब कोरोना महामारी पर नियंत्रण हो जाए।

वहीं, 44% लोगों का मानना है कि जब भी स्कूल खुलें तो केवल 9वीं से 12वीं तक की क्लास लगे, जबकि केजी से 8वीं तक की क्लास ऑनलाइन ही हो। 71% ने कहा कॉलेज तभी खुलें जब कोरोना पर नियंत्रण हो जाए।

देश के 11 राज्यों में हुआ सर्वे, 73,271 लोगों ने दिए जवाब; इन 10 सवालों के जरिए हमने जानने की कोशिश की कि पैरेंट्स क्या चाहते हैं?

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