गुरु पूर्णिमा पर ऐसे करें पूजा, जानिए गुरु मंत्र

गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु-शिष्य के पवित्र रिश्ते को समर्पित है। इस दिन शिष्य अपने गुरु की चरण वंदना करता है और उनसे ज्ञान का वरदान प्राप्त करता है। गुरु पूर्णिमा का पर्व वेदों का रचयिता महर्षि वेद व्यास को समर्पित है। इस दिन भक्त अपने गुरु की पूजा करते हैं। गुरु के ब्रह्मलीन होने पर उनकी चरणपादुका की पूजा कर उनके प्रति आभार और श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

ऐसे करें गुरु पूर्णिमा पर पूजा

गुरु पूर्णिमा के दिन मंदिरों, मठों और आश्रमों में गुरु पूजन का आयोजन किया जाता है। गुरु पूर्णिमा की पूजा घर पर भी की जाती है। इसके लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और नित्यकर्म से निवृत्त होकर पूजा की तैयारी करें। यदि गुरु ब्रह्मलीन हो गए हैं तो उनका चित्र एक पाट पर सफेद कपड़ा बिछाकर स्थापित करें। गुरु की कुमकुम, अबीर, गुलाल आदि से पूजन करें। मिठाई, ऋतुफल, सूखे मेवे, पंचामृत का भोग लगाएं। सुगंधित फूलों की माला समर्पित करें। इसके बाद आरती उतारकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें। पूजा के दौरान श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें।

इस समय करें पूजा

गुरु पूर्णिमा के दिन ही चंद्रग्रहण भी हैं। इसलिए इस बात का खास ख्याल रखें कि समय रहते पूजा विधान को संपन्न कर लें। चंदग्रहण बुधवार देर रात 1 बजकर 33 मिनट से लगेगा। ग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले यानी मंगलवार को शाम 4 बजे से लग जाएगा। ग्रहण और सूतक दोनों में पूजा का निषेध रहता है।

गुरु पूर्णिमा के मंत्र

ओम गुरुभ्यो नम:।

ओम गुं गुरुभ्यो नम:।

ओम परमतत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नम:।

ओम वेदाहि गुरु देवाय विद्महे परम गुरुवे धीमहि तन्नौ: गुरु: प्रचोदयात्।

गुरूर्ब्रह्मा गुरूर्विष्णुः गुरूर्देवो महेश्वरः।

गुरू साक्षात् परंब्रह्म तस्मै श्री गुरूवे नमः॥

अज्ञान तिमिरांधश्च ज्ञानांजन शलाकया,चक्षुन्मीलितम तस्मै श्री गुरुवै नमः।

बंदउँ गुरु पद कंज कृपा सिंधु नररूप हरि।

महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥

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