दो-चार नंबर के बीच लालवानी की ‘चाबी’ तो संघवी को यहां से आसरा

इंदौर। इंदौर में भाजपा की राजनीति सुमित्रा महाजन और कैलाश विजयवर्गीय खेमे के बिना पूरी नहीं मानी जाती। लेकिन दशकों बाद यह पहला लोकसभा चुनाव है जो ताई और भाई के बिना लड़ा जा रहा है। विजयवर्गीय बंगाल की जिम्मेदारी के साथ शहर से दूर हैं तो ताई चुनाव लड़ने से इनकार कर चुकी हैं। उधर जातिगत समीकरण और सबको साधने के फॉर्मूले में फिट शंकर लालवानी की ‘चाबी’ दो और चार नंबर विधानसभा क्षेत्रों के पास है।
दरअसल आठ बार की सांसद ताई की अनुशंसा पर ही लालवानी का टिकट तय हुआ। उन्होंने पैनल में लालवानी का नाम इसलिए भी सबसे ऊपर रखकर भेजा, क्योंकि उनके नाम पर विजयवर्गीय और अन्य विधायकों का समर्थन मिलने में भी कोई परेशानी नहीं होगी। भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी तय होने के साथ ही दोनों दलों ने हर विधानसभा क्षेत्र के अनुसार गुणा-भाग करना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ग्रामीण की तीनों सीटें और विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक में अपने विधायकों के दम पर यह दावा कर रही है कि इंदौर में भाजपा का तिलिस्म इस बार टूट जाएगा।
कांग्रेस को तीन और पांच नंबर विधानसभा क्षेत्र से भी अच्छी संख्या में मत मिलने की उम्मीद है क्योंकि यहां विधानसभा चुनाव में भाजपा मामूली बढ़त से ही जीत पाई थी। उधर भाजपा विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों से व्यक्तिगत नाराजगी से मिली हार का दावा कर लोकसभा में अपने पक्ष में माहौल होने की बात कह रही है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक एक
बीते दिनों हुए विधानसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस के खाते में जरूर चली गई है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनावों में हुए वोटिंग ट्रेंड से भाजपा को उम्मीद है कि इस बार भी यहां भाजपा के पक्ष में ही वोट होगा। दरअसल इसके पूर्व भी विधानसभा परिणाम चाहे जो भी रहा हो, लेकिन लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र से भाजपा को बढ़त मिलती आई है। पूर्व विधायक सुदर्शन गुप्ता और लालवानी संगठन में साथ काम कर चुके हैं। जबकि कांग्रेस अपने नए नवेले विधायक संजय शुक्ला के साथ ही गोलू अग्निहोत्री, कमलेश खंडेलवाल सहित अन्य नेताओं के भरोसे यहां से जीत की उम्मीद लगाए है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक दो
तीन दशकों से यह क्षेत्र विजयवर्गीय-मेंदोला खेमे का गढ़ रहा है। विधायक रमेश मेंदोला लोकसभा के लिए चुनाव संचालक भी हैं इसलिए भाजपा को विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा में भी यहां से बड़ी लीड की उम्मीद है। कांग्रेस इस क्षेत्र में जितना छीन सको छीन लो और आगे चलो की रणनीति पर काम कर रही है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक तीन
यहां भाजपा को पांच हजार से कुछ ही ज्यादा वोटों से जीत हासिल हुई थी। यहां मुकाबला कांटे का होगा। भाजपा को उम्मीद है कि यहां के परंपरागत कांग्रेस नेताओं के बीच संघवी की खांटी पैठ नहीं है। इसके ठीक विपरीत संघवी समर्थकों का कहना है कि वे तालमेल बना लेंगे। व्यापारिक वर्ग को भी अपने साथ ले आएंगे।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक चार
लक्ष्मणसिंह गौड़ के निधन के बाद चार नंबर विधानसभा के टिकट को लेकर लालवानी और गौड़ खेमे के बीच दूरी बढ़ी। बीते विधानसभा चुनाव में भी लालवानी ने यहां से विधानसभा टिकट के लिए काफी जोर लगाया था। लेकिन चार नंबर परंपरागत रूप से भाजपाई क्षेत्र माना जाता है। गौड़ परिवार भी पार्टी लाइन को क्रॉस नहीं करता है। इसलिए यहां भी संगठन काम पर जुट जाएगा। उधर कांग्रेस दो नंबर की रणनीति चार नंबर में अपनाकर ज्यादा से ज्यादा वोट हासिल करने की जुगत में है।
विधानसभा क्षेत्र क्रमांक पांच
बीते विधानसभा चुनाव में भाजपा यहां संघर्ष के बाद जीत पाई थी। यहां के जातिगत समीकरणों की वजह से कड़े मुकाबले की स्थिति बनेगी। कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक भी यहां बड़ी संख्या में मौजूद हैं। कांग्रेस प्रत्याशी पंकज संघवी का भी यही कार्यक्षेत्र है। वे विधानसभा चुनाव में भी यहीं से टिकट की दावेदारी करते आए हैं।
विधानसभा राऊ
बीते दो विधानसभा चुनावों से यह सीट भाजपा के हाथ से निकल गई है। यहां से केबिनेट मंत्री जीतू पटवारी विधायक हैं। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जीतू जिराती, मधु वर्मा और वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्णमुरारी मोघे पर यहां से बढ़त दिलवाने का दारोमदार रहेगा। उधर अपने विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस को लीड दिलवाने के लिए पटवारी की प्रतिष्ठा भी दांव पर रहेगी।
विधानसभा क्षेत्र देपालपुर
भाजपा इस विधानसभा चुनाव में देपालपुर सीट गंवा चुकी है। लेकिन उसे कांग्रेस के दो खेमों में बंटे होने से वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद हैं। इसके साथ ही ताई की मजबूत टीम भी इस क्षेत्र में सक्रिय है। उधर दो और चार नंबर की लीड पाटने के लिए कांग्रेस यहां विधायक विशाल पटेल के भरोसे है। पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल को भी संगठन ने अपने क्षेत्र में सक्रिय होने के लिए कहा है।
विधानसभा क्षेत्र सांवेर
बदलाव के स्वभाव वाली यह विधानसभा सीट कांग्रेस के खाते में है। यहां से केबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट विधायक हैं। सिलावट दोहरी जिम्मेदारी के साथ काम कर रहे हैं। गुना में सिंधिया के लिए भी जोर लगा रहे हैं वहीं अपने विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी को लीड दिलवाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। उधर लालवानी यहां भी ताई की टीम के भरोसे मैदान में है। पूर्व विधायक राजेश सोनकर सहित अन्य पदाधिकारी विधानसभा के लिए बैठकें ले रहे हैं।

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