नई कप्तान ने बिगाड़ दिए अय्याशों के समीकरण

नाबालिग के माता-पिता को उत्तर प्रदेश से ले आए थे बैतूल 
मामला उजागर होने पर एसपी के हस्तक्षेप से पुन: होगी इंक्वायरी
बैतूल।
शहर के चक्कर रोड के नाम पर मशहूर हो चुके हाईप्रोफाइल नाबालिग रेप काण्ड और देह व्यापार के मामले में अगर नई कप्तान की पदस्थापना नहीं होती तो यकीन मानिए सब कुछ ना सिर्फ रफा-दफा हो जाता बल्कि फाइल भी बंद हो जाती। लेकिन नई कप्तान के आने से एक बार फिर सुर्खियों में मामले के आने के बाद लगभग बंद हो चुकी फाइल पुन: खुलने लगी है। अब देखना यह है कि पुन: फाइल खोलने में कौन-कौन से नए-नए नाम शामिल होते हैं और पुराने नामों का क्या होता है? बहरहाल कुल मिलाकर नई कप्तान ने अय्याशों के समीकरण बिगाड़कर रख दिये
है।
इस मामले पर एक-एक नजरें गड़ाए विश्वनीय सूत्रों की माने तो चक्कर रोड रेप काण्ड में कप्तान के बदलने और नए कप्तान के पदस्थ होने के पहले ही क्या करना है इसकी पूरी पटकथा लिखी जा चुकी थी। पटकथा कुछ प्रकार की थी कि इस काण्ड की फाइल बंद करके और नाबालिग के माता-पिता को उत्तर प्रदेश से बैतूल लाकर बच्ची उनके सुपुर्द कर दिया जाए ताकि पूरी फिक्चर ही खत्म हो सकें। इसके बाद ना तो संमस की तामिल उत्तर प्रदेश में हो पाती और ना ही उत्तर प्रदेश से नाबालिग बैतूल आ पाती। इसलिए बकायदा स्वीफ्ट डिजायर बैतूल से उत्तर प्रदेश भेजी गई और नाबालिग के माता-पिता को बैतूल लाया गया ताकि नाबालिग को उत्तर प्रदेश ले जा सकें, लेकिन ऐन वक्त पर सबकुछ टांय- टांय फिस्स हो गया। सूत्रों ने बताया कि उत्तर प्रदेश गाड़ी भिजवाने और माता-पिता को बैतूल तक लाने के लिए इस मामले में इंवाल्व रसियाओं ने अच्छी रकम खर्च की है। सूत्रों ने तो यहां तक बताया कि इस मामले में पुलिस की भूमिका भी खासी संदिग्ध नजर आ रही है। क्योंकि कप्तान के बदलने के पहले पुलिस का यह कहना था कि नाबालिग रेप काण्ड मामले में लगभग जांच-पड़ताल पूर्ण हो चुकी है और नाबालिग को उसके घर उत्तर प्रदेश उसके परिवार में भेजा जा सकता है, इसके लिए बकायदा महिला आरक्षक की व्यवस्था भी कर ली गई थी। लेकिन नई कप्तान की पदस्थापना के साथ ही पुलिस के सूर भी बदल गए हैं और वह अब यह कहने लगी है कि अभी बहुत सी जांच होना बाकी है, अभी नाबालिग को उसके माता-पिता को नहीं सौंपा जा सकता है। आखिर नई कप्तान के आने के बाद ऐसी कौन सी स्थिति निर्मित हो गई कि पुलिस इतनी सक्रिय हो गई? इसके पीछे सूत्रों का कहना है इस मामले में पुरानी फाइल लगभग बंद हो जाने से पुलिस अधिकारी और इस मामले में इंवाल्व बेखबर घूम रहे हैं कि अब वह जंग जीत चुके हैं लेकिन चार दिनों में जो घटनाक्रम घटित हुआ है उससे इस मामले से जुड़े हर शख्स के हाथ-पांव फूले हुए हैं कि कहीं उनकी सफेद कॉलर दागदार ना हो जाए।
पूरे मामले पर नजर डाले तो इस प्रकार से चक्कर रोड काण्ड घटित हुआ था जिसमें उत्तर प्रदेश की 17 साल की नाबालिग लड़की को तीन महीने पहले बैतूल में सिर्फ छह हजार रुपये में बेचा गया था और पीडि़ता से पिछले दो माह से जबरदस्ती देह व्यापार कराया जा रहा था। आरोपियों के चुंगल से भागी पीडि़ता ने पुलिस में शिकायत की थी। पीडि़ता की रिपोर्ट पर आरोपियों के खिलाफ धारा 370(4), 370 (6), 370 (ए), 372, 376 (2एन) आईपीसी एक्ट के तहत 5 एल/6,11/12,16/17, पॉक्सो एक्ट 5,6 अनैतिक (देह व्यापार) के मामले में सबसे पहले देह व्यापार का अड्डा चलाने वाली किरण और शीतल नाम की दो महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में इन महिला आरोपियों के अलावा हर्षित गायकवाड़ जो की एक निजी फायनेंस कम्पनी में कार्य करता है। उसे सबसे पहले गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में दो अन्य आरोपियों शरद हड्डी उर्फ शरद बाबा एवं अंकुश उर्फ टीनू सोनी को गिरफ्तार किया है।  इस मामले में विशाल मेगा मार्ट के स्टोर मैनेजर रजित माहेश्वरी को भी गिरफ्तार किया था।
चक्कर रोड सहित अन्य प्रकरणों की भी खुलेगी फाइल:एसपी
नवागत पुलिस अधीक्षक सुश्री सिमाला प्रसाद ने बातचीत में बताया कि चक्कर रोड के बहुचर्चित मामले सहित अन्य सभी महत्वपूर्ण लंबित मामलों की फाइल फिर से खुलेगी और उनकी जांच की जाएगी। उम्मीद है डायरेक्ट आईपीएस अफसर की देखरेख में जिले में घटित गंभीर अपराधों की फाइल रि-ओपन होने से बेफ्रिक होकर घूम रहे अपराधियों पर नकेल कसी जा सकेगी। 

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