गुटखा कारोबारी वाधवानी के कारनामों का खुलासा, सरकार को 105 करोड़ की चपत लगाई

इंदौर। पान गुटखा के नाम पर शासन को राजस्व के रूप में 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान पहुंचाने वाले किशोर वाधवानी के कारनामों का खुलासा जारी है। सोमवार को डायरेक्टर जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलीजेंस (डीजीजीआइ) ने ऑपरेशन कर्क फेज 2 पर लिखित नोट जारी करते हुए उसे मास्टरमाइंड करार दिया। एक और घोटाला उजागर करते हुए बताया कि दस्तावेजों में सिर्फ पांच फीसद उत्पादन बताकर सिगरेट में भी टैक्स चोरी कर सरकार को 105 करोड़ रुपये की चपत लगाई।

टैक्स चोरी का यह आकलन फिलहाल सिर्फ अप्रैल 2019 से मई 2020 के बीच का है। फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा है डीजीजीआइ को आशंका है कि इससे कई गुना ज्यादा कर चोरी की गई है। उत्पादन की जानकारी सार्वजनिक करने से बचने के लिए मशीनों को जनरेटरों से चलवाया जाता था।

डीजीजीआइ को जानकारी मिली थी कि पान मसाला उत्पादन के नाम पर शासन को 400 करोड़ रुपये से ज्यादा की क्षति पहुंचा चुका मास्टरमाइंड किशोर वाधवानी सिगरेट उत्पादन के अवैध धंधे में भी लिप्त है। उसे 15 जून को ही मुंबई से हिरासत में लिया गया था। जांच में यह भी पता चला कि एलोरा टोबैको कंपनी लिमिटेड इंदौर के नाम पर अलग-अलग ब्रांड की सिगरेट का उत्पादन किया जाता है।

जून के तीसरे सप्ताह में डीजीजीआइ ने फर्म के पांच अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी थी। पिछले दो वित्तीय वर्ष के दौरान इस फर्म ने 2.09 करोड़ रुपये और 1.46 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में जमा किए थे। दस्तावेजों की जांच में डीजीजीआइ को पता चला कि इस फर्म ने अप्रैल 2019 से मई 2020 यानी 13 महीनों में करीब 105 करोड़ रुपए की टैक्स चोरी की है। इस बात की आशंका भी है कि यह फर्जीवाड़ा लंबे समय से चल रहा था। टैक्स चोरी की रकम 105 करोड़ रुपए से कई गुना ज्यादा भी हो सकती है।

गुप्त रास्ते से आता-जाता था माल

छापे के दौरान यह भी पता चला कि जिस जगह सिगरेट का अवैध उत्पादन किया जा रहा था, वहां कच्चा माल भीतर लाने और बना हुआ माल बाहर भेजने के लिए गुप्त रास्ता बना रखा था। इसी रास्ते से टैक्स चोरी का माल अलग-अलग जगह भेजा जाता था। कंपनी के अकाउंटेट, सुपरवाइजर और अन्य स्टाफ से पूछताछ में यह भी पता चला कि सिर्फ 5 प्रतिशत उत्पादन को ही रिकॉर्ड पर बताया जाता था। बाकी उत्पादन फर्जी तरीके से बाहर भेज दिया जाता था।

उत्पादन की जानकारी विभाग से छिपाने के लिए मशीनों को जनरेटर से चलाया जाता था। जब्त माल की एमआरपी 27 करोड़ रुपये डीजीजीआइ के अनुसार सिगरेट के10 और ए10 के ब्रांड नाम से बनाई जाती थीं। गोदाम में जो पैकिंग सामग्री मिली है, वह पांच हजार कार्टन पैकिंग के लिए पर्याप्त था।

एक कार्टन में 12 हजार सिगरेट रखी जाती थी। इस पैकिंग सामग्री में जितनी सिगरेट की पैकिंग होनी थी, उसका अनुमानित अधिकतम मूल्य 27 करोड़ के लगभग है। आशंका है कि इस तरह के कई गोदाम इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में और भी हो सकते हैं। डीजीजीआइ इनका पता लगाने की कोशिश में है।

मीडिया हाउस के नाम पर भी फर्जीवाड़ा

डीजीजीआइ का कहना है कि आरोपित ने एक मीडिया हाउस खोलकर उसके नाम पर भी फर्जीवाड़ा किया है। उसने अखबार की प्रसार संख्या 1 लाख 20 हजार से डेढ़ लाख प्रतिमाह बताई है जबकि वास्तव में प्रसार संख्या चार से छह हजार प्रतिमाह ही है। पान मसाला, सिगरेट के अवैध व्यापार से कमाई रकम को अखबार से बताकर फर्जीवाड़ा किया जाता था।

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