जानिए क्‍यों इस बार बेहद अशुभ माना जा रहा है सूर्यग्रहण, देश-दुनिया में हो सकती हैं ये बड़ी घटनाएं

6 ग्रहों का वक्री होना अति दुर्लभ

सूर्यग्रहण की घटना जहां खगोलीय और वैज्ञानिक दृष्टि से अति महत्‍वपूर्ण होती है। वहीं ज्‍योतिष के लिहाज से भी इसे बड़े फेरबदल वाली युति माना जाता है। इस साल 21 जून को बड़ा सूर्यग्रहण है जो कि ग्रहों की विशिष्‍ट स्थिति के कारण और भी खास माना जा रहा है। इस वक्‍त विशिष्ट ग्रह स्थिति का निर्माण हो रहा होगा क्योंकि, बृहस्पति, शनि, मंगल, शुक्र, राहु और केतु वक्री अवस्था में होंगे। राहु और केतु सदैव ही वक्री रहते हैं। इस प्रकार एक साथ 6 ग्रहों का वक्री होना वास्तव में इस सूर्य ग्रहण को बहुत ही अधिक प्रभावशाली बनाएगा। आइए जानते हैं क्‍या-क्‍या हो सकते हैं इस ग्रहण के प्रभाव…
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अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव
कोरोनाकाल में जहां पुरी दुनिया की अर्थव्‍यवस्‍था पहले की औंधे मुंह गिर चुकी हैं वहीं सूर्य ग्रहण भी भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को पलीता लगाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि स्वतंत्र भारत की कुंडली के दूसरे भाव में यह ग्रहण घटित होगा जो भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी गहरा प्रभाव डालेगा और बैंकिंग सेक्टर में भी काफी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। बैंकिंग के क्षेत्र में बीते साल भी काफी बड़े फेरबदल देखे गए थे। माना जा रहा है कि यह साल भी बड़े बदलावों वाला साबित होगा।
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प्राकृतिक आपदाएं
जहां एक ओर कोरोना वायरस की वजह से सारी दुनिया मानो थम सी गई हो वहीं बार-बार आ रहे तूफान और भूकंप ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी है। अब यह ग्रहण बड़ी प्राकृतिक आपदाओं का कारक बन सकता है, जिसकी वजह से भूकंप आने, भूस्खलन होने, वर्षा की कमी होने और बहुत तेज हवाओं, आंधी या तूफान के योग बन सकते हैं।

राष्‍ट्रों के बीच बढ़ेगी दुश्‍मनी
माना जा रहा है कि इस ग्रहण के प्रभाव से बड़े-बड़े देशों के बीच दुश्‍मनी और गहरा सकती है। कोरोना वायरस पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है, इसके पीछे चीन को जिम्‍मेदार ठहराया जा रहा है और अब सीमा पर चीनी सेनाओं और भारतीय जवानों के बीच हुई झड़प इस पड़ोसी देश की मंशा को साफ कर चुके हैं। यह सूर्य ग्रहण बड़े-बड़े देशों के मध्य सत्ता का संघर्ष और देश की आंतरिक समस्याओं में तेजी से वृद्धि होने का भी संकेत देता है।
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व्‍यापारियों को लाभ
इस ग्रहण के प्रभाव से जो लोग व्यापार करते हैं, उनके लिए यह अच्छे परिणाम मिलने के योग बन रहे हैं। गेहूं, धान और अन्य अनाजों के उत्पादन में थोड़ी कमी आ सकती है और दूध के उत्पादन में भी गिरावट आने के संकेत दिखाई देते हैं। लॉकडाउन खुलने की प्रक्रिया की शुरुआत में लगा था कि अब व्‍यापारियों के कामधंधे फिर से पटरी पर आ जाएंगे, लेकिन कोरोना के बढ़ते मामलों ने सारी उम्‍मीदों पर पानी फेर दिया है। लोग अब डर से बाहर नहीं निकल रहे हैं।

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