उप चुनाव में किसान के बजाए गेहूं होगा मुद्दा, कांग्रेस-बीजेपी सेकेंगी रोटी

भोपाल.मध्य प्रदेश की 24 विधानसभा सीटों के उपचुनाव में इस बार गेहूं की बंपर पैदावार और खरीद का मुद्दा गूंजेगा.बीजेपी और कांग्रेस दोनों अपनी-अपनी तरह से इसे भुनाने की तैयारी में हैं. कांग्रेस का का दावा है कि पैदावार उसकी सरकार में हुई और बीजेपी कह रही है रिकॉर्ड खरीद तो हमारी सरकार ने की.

प्रदेश में इस बार गेहूं की बंपर पैदावार चुनावी मुद्दा होगा. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने ही किसान वोटरों को साधने के लिए अनाज की बंपर पैदावार से लेकर उसकी खरीदी तक को चुनाव में कैश कराने की तैयारी कर ली है. बीजेपी सरकार में इस बार रिकॉर्ड गेहूं की खरीदी हुई है. सरकार का दावा है कि प्रदेश में एक करोड़ 28 लाख 13 हजार मीट्रिक टन गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी की गई है. इससे 15 लाख 74 हजार किसानों को फायदा होगा. सरकार के मुताबिक प्रदेश में अनाज खरीदी के एवज में अब तक किसानों के खाते में 20 हजार करोड़ रुपए डाले जा चुके हैं. कुल 14 लाख 8 हजार किसानों के खाते में पैसा डाला जा चुका है. बाकी 21 हजार 174 करोड़ की राशि का भुगतान किया जा रहा है.

हमारी सरकार-हमारा काम
सरकार का दावा है प्रदेश में इस बार 5 लाख 50 हजार मीट्रिक टन  चना भी खरीदा गया. गेहूं खरीदी के मामले में मध्यप्रदेश देश में नंबर वन बना है और ये शिवराज सरकार की नीतियों का असर है. बीजेपी के मुताबिक कांग्रेस सरकार में बजट का रोना रोया जाता था और वित्तीय स्थिति खराब बताई जाती थी. लेकिन शिवराज सरकार की साफ नीयत के कारण किसानों से रिकॉर्ड अनाज की खरीदी की गई है. प्रदेश में अनाज खरीदी से किसान खुश हैं और यह सब शिवराज सरकार की नीतियों के कारण संभव हो पाया है.

कमलनाथ सरकार में हुई रिकॉर्ड पैदावार

बीजेपी चाहें जो कहे कांग्रेस का तो सीधा-सीधा जवाब और दावा है कि अनाज की बंपर पैदावार तो हमारी कमलनाथ सरकार के दौरान हुई है. पार्टी का दावा है कि पूर्व की कमलनाथ सरकार में लिए गए फैसलों के कारण प्रदेश में इस बार गेहूं की बंपर पैदावार संभव हो सकी है. पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे का कहना है किसान कर्ज माफी और बिजली बिल हाफ सहित किसान हित में लिए गए फैसलों के कारण ही इस बार बंपर पैदावार हुई है. इसलिए प्रदेश की जनता को बताया जाएगा कि किस तरह कांग्रेस सरकार ने किसान हित में फैसले लिए थे.

15 ज़िले 24 सीट
प्रदेश में 15 जिलों में 24 विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है. ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही खुद को किसान हितैषी बताते हुए उन्हें साधने की कोशिश में हैं. गेहूं की बंपर पैदावार भले ही किसानों की मेहनत का फल है. लेकिन इसका क्रेडिट लेने की होड़ बीजेपी और कांग्रेस के बीच चल रही है.

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