सिंधिया को कोरोना हुआ तो हुआ, गडकरी करेंगे मध्य प्रदेश उपचुनाव का शंखनाद

भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा की 24 सीटों के उपचुनाव के लिए सियासी संग्राम का विधिवत आगाज आज होने जा रहा है. ऐसे में जबकि बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया कोरोना होने के बाद अस्पताल में भर्ती हैं, उनकी गैरमौजूदगी में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी बीजेपी की ओर से चुनावी समर का शंखनाद करने वाले हैं. अमित शाह की तर्ज पर नितिन गडकरी बुधवार को शाम 4 बजे वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगे. बीजेपी ने इस रैली में 1 लाख लोगों को ऑनलाइन जोड़ने की तैयारी की है. हालांकि यह रैली मोदी सरकार 2 के एक साल पूरा होने की उपलब्धियां गिनाने के लिए हो रही है, लेकिन माना जा रहा है कि इसके साथ ही प्रदेश में बीजेपी के चुनावी रण का आगाज हो जाएगा. सूत्रों की मानें तो गडकरी इस दौरान ग्वालियर-चंबल को लेकर कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं.

सीएम ने कही थी ये बात

दरअसल, कुछ वक्त पहले ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोशल मीडिया में ट्वीट किया था कि चंबल में बनने वाला एक्सप्रेस वे अब चंबल एक्सप्रेस वे के बजाए चंबल प्रोग्रेस वे के नाम से बनेगा. इस एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर इंडस्ट्रियल हब डेवलप किए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने एक्सप्रेस-वे के सिलसिले में तब केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से फोन पर बात भी की थी. सीएम शिवराज ने अब तक एक्सप्रेसवे का काम शुरू ना हो पाने को लेकर कांग्रेस की सरकार को जिम्मेदार ठहराया था. सीएम के आरोपों के तहत चंबल एक्सप्रेस वे के काम को कांग्रेस ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था. जबकि अब नितिन गडकरी अपनी वर्चुअल रैली के दौरान प्रोग्रेस वे को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं.

24 में से 16 सीट ग्वालियर-चंबल में

मध्य प्रदेश में जिन 24 सीटों पर उपचुनाव होना है उनमें से 16 सीटें अकेले ग्वालियर चंबल संभाग की हैं. ऐसे में चुनावी बिसात के लिहाज से एक्सप्रेस वे का जिक्र अहम माना जा रहा है. ग्वालियर चंबल के लोगों को एक्सप्रेस वे का इंतजार पिछले काफी वक्त से था. ऐसे में उपचुनाव से पहले प्रोग्रेस वे के नाम से बनने वाले इस एक्सप्रेस-वे का सियासी माइलेज लेने की कोशिश बीजेपी की ओर किया जाना तय है.

क्या है प्रोजेक्ट ?
केंद्र सरकार ने जिन 43 नए राजमार्गों का ऐलान किया था उनमें चंबल एक्सप्रेस वे भी शामिल था. यह एक्सप्रेस वे मुरैना से श्योपुर के बीच करीब 200 किलोमीटर के बीच बनाया जाना है. शुरुआती दौर में इसकी अनुमानित लागत करीब 800 करोड रुपए बताई गई थी. हालांकि बाद में जब कांग्रेस सरकार के दौरान चंबल एक्सप्रेस वे की डीपीआर तैयार होने की प्रक्रिया शुरू हुई तो इसमें से भिंड जिले को बाहर कर दिया गया था, इस पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चिट्ठी लिखकर तब के मुख्यमंत्री कमलनाथ से अनुरोध किया था कि भिंड को इस प्रोजेक्ट से बाहर न किया जाए. एक्सप्रेस वे बनने के बाद ये माना जा रहा हैं कि चंबल में टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही बीहड़ की बेकार पड़ी ज़मीन का इस्तेमाल हो सकेगा.

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