अब लगेगा सूर्य ग्रहण, जानिये तारीख-समय एवं सूतक काल, कहां दिखाई देगा

गत 5 जून को चंद्र ग्रहण लगा। अब आने वाली 21 जून को एक और ग्रहण की घटना होने जा रही है। यह सूर्य ग्रहण होगा। इसे धार्मिक दृष्टि से महत्‍वपूर्ण माना जा रहा है क्‍योंकि यह चंद्र ग्रहण के मात्र 16 दिन बाद लग रहा है जो कि हिंदू काल गणना के मान से एक पाक्षिक (15 दिन) की अवधि पूरी होने पर लगेगा। दूसरा यह ग्रहण कंकणाकृति होगा एवं भारत में खंडग्रास रूप में दिखाई देगा। गत चंद्र ग्रहण में तो सूतक मान्‍य नहीं था लेकिन सूर्य ग्रहण में सूतक का काल मान्‍य होगा। इसकी अवधि 12 घंटे पहले से ही लग जाएगी। यह ग्रहण भारत, दक्षिण पूर्व यूरोप एवं पूरे एशिया में देखा जा सकेगा। पिछले साल के आखिरी सप्‍ताह और इस साल के पहले सप्‍ताह में ग्रहण का संयोग था। पहले सूर्य ग्रहण उसके बाद चंद्र ग्रहण लगा था। अब इस बार पहले चंद्र ग्रहण लगा है और उसके बाद सूर्य ग्रहण होगा। इसके बाद आगामी 5 जुलाई को एक बार फिर से चंद्र ग्रहण लगेगा।

सूर्य ग्रहण का सूतक, स्‍पर्श एवं मोक्ष का समय

भारतीय मानक समय अनुसार सूर्य ग्रहण का आरंभ 21 जून की सुबह 10 बजकर 42 मिनट पर होगा। यह वलयाकार सूर्य ग्रहण रहेगा। इसका सूतक 20 जून की रात 10 बजे से आरंभ हो जाएगा। ग्रहण का मध्‍य 12 बजकर 24 मिनट दोपहर पर होगा। इसका मोक्ष दोपहर 2 बजकर 7 मिनट पर होगा। इस ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 25 मिनट की रहेगी। यह अधिकांश भू-मंडल पर दिखाई देगा। इसके बाद मौजूदा वर्ष के अंत में एक और सूर्य ग्रहण होगा।

इस स्‍थान पर सूर्य का सिर्फ एक प्रतिशत हिस्सा नजर आएगा

21 जून को राजस्थान में दो जगहों पर सूर्यग्रहण के दौरान सूर्य का सिर्फ एक प्रतिशत भाग ही दिखाई देगा। इसकी आकृति कंगन जैसी दिखेगी। जहां पर यह दृश्‍य दिखाई देगा वह स्थान राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घडसाना और सूरतगढ़ हैं। उत्तरी राजस्थान में करीब 20 किमी की पट्टी में सूर्य का 99 प्रतिशत भाग ग्रहण में नजर आएगा। शेष राजस्थान के लोगों को आंशिक सूर्य ग्रहण दिखेगा। राजस्थान के लोग पहली बार वलयाकार सूर्य ग्रहण देख सकेंगे। जयपुर के बी.एम.बिड़ला तारामण्डल के सहायक निदेशक संदीप भट्टाचार्य ने बताया कि आगामी 21 जून को होने वाला सूर्यग्रहण 25 साल पहले घटित हुए 24 अक्टूबर 1995 के ग्रहण की याद दिलाएगा। उस दिन भी पूर्ण सूर्य ग्रहण के चलते दिन में ही अंधेरा छा गया था। पक्षी घोंसलों में लौट आए थे। हवा ठंडी हो गई थी।

कंकणाकृति ग्रहण होने का यह है मतलब

कंकणाकृति के ग्रहण के समय सूर्य किसी कंगन की भांति नज़र आता है। इसलिए इसे कंकणाकृति ग्रहण कहा जाता है। पिछली बार वर्ष 1995 के पूर्ण ग्रहण के समय ऐसा ही हुआ था।

सूर्य के वलय पर दिखेगा चांद का पूरा आकार

21 जून को सूर्य के वलय पर चंद्रमा का पूरा आकार नजर आएगा। सूर्य का केन्द्र का भाग पूरा काला नजर आएगा, जबकि किनारों पर चमक रहेगी। इस तरह के सूर्य ग्रहण को पूरे विश्व में कहीं-कहीं ही देखा जा सकता है और अधिकांश जगह लोगों को आंशिक ग्रहण ही नजर आता है। जब भी सूर्य ग्रहण होता है, दो चंद्र ग्रहण के साथ होता है। इसमें या तो दोनों चंद्रग्रहण उससे पहले होते हैं अथवा एक चंद्रग्रहण सूर्य ग्रहण से पहले एवं दूसरा सूर्यग्रहण के बाद दिखाई देता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है।

मिथुन राशि में लगेगा ग्रहण, 6 ग्रह होंगे वक्रीय

आगामी 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में लगेगा। विशेष बात ये है कि इस ग्रहण में सूतक काल मान्य होगा, जो कि ग्रहण से 12 घंटे पूर्व लगेगा। इस सूर्य ग्रहण इस दिन 6 ग्रह वक्री होंगे जो कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुभ नहीं माना जा रहा है। हालांकि कंकणाकृति होने का अर्थ यह है कि इससे कोरोना का रोग नियंत्रण में आना शुरू हो जाएगा, लेकिन अन्‍य मामलों में यह ग्रहण अनिष्‍टकारी प्रतीत हो रहा है।

इस साल इतने ग्रहण लग चुके और लगने वाले हैं इतने

– पहला: 10-11 जनवरी, चंद्र ग्रहण

– दूसरा: 5 जून को होगा, यह भी चंद्र ग्रहण था

– तीसरा: 21 जून को होगा, यह सूर्य ग्रहण होगा

– चौथा: 5 जुलाई को होगा, चंद्र ग्रहण होगा

– पांचवा: 30 नवंबर को होगा। यह इस वर्ष का तीसरा चंद्र ग्रहण होगा

– छठा: 14 दिसंबर को होगा, यह साल का दूसरा सूर्य ग्रहण होगा

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