अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों…!

जीवन और जीविकोपार्जन के लिए यूं चलते रहेगा संघर्ष
कोरोना काल में नजीर साबित हो सकता है कपड़ा व्यापारियों का निर्णय

मयंक भार्गव

वर्तमान में कोरोना संक्रमण रूपी वैश्विक महामारी तांडव मचा रही है। इस बीमारी से निजात पाने के लिए ना तो अभी तक संसार को कोई कारगर दवाई मिली है और ना ही वैक्सीन बन पाई है? इस दिशा में आम इंसान करें तो क्या करें? यदि वह अपना व अपने परिवार का जीवन बचाने की सोचता है तो जीविकोपार्जन छूट जाती है और यदि जीविकोपार्जन को बचाने के लिए लगा रहता है तो स्वयं और परिवार का जीवन दांव पर लगता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो जीवन और जीविकोपार्जन के लिए यह संघर्ष कब तक चलेगा और कब इससे निजात मिलेगी? इसको लेकर कोई सटीक भविष्यवाणी नहीं कर सकता है। यही वजह है कि बड़े-बड़े ज्योतिषी भी कोरोना वायरस कोविड-19 पर कुछ कहने के बजाए चुप रहना ही बेहतर समझ रहे हैं। क्योंकि कोरोना वायरस ने सारे अनुमान, परिणाम बदलकर रख दिए हैं।
जीवन और जीविकोपार्जन के लिए संघर्ष में सरकार ने भी अब एक तरह से अपने हाथ खड़े कर लिए हैं। सरकार ने भी अब यह सोच लिया है कि मार्च-अप्रैल और मई तीन माह में देशवासियों को उसने बार-बार हाथ धोना, सोशल डिस्टेंसिंग रखना और मास्क पहनना सीखा दिया है। इसके बाद भी अगर कोई इन नियमों को फॉलो नहीं करता है तो यह उसकी गलती है, सरकार की नहीं। यही वजह है कि अमेरिका, चीन, जापान, इटली, फ्रांस सहित दुनिया के कई देशों ने कोरोना महामारी से मुकाबला करने किया गया लॉकडाऊन उस समय धीरे-धीरे खोला जब उनके देश में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा कम होना शुरू हो गया था। लेकिन संभवत: समूचे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जिसने देश में कोरोना के मरीज बढऩे के होने से पूर्व ही लॉकडाऊन कर दिया था। इसका लाभ भी देशवासियों को मिला। लेकिन जैसे-जैसे सरकार ने लॉकडाऊन खोलना प्रारंभ कर दिया ठीक वैसे-वैसे कोरोना संक्रमितों का प्रतिदिन मिलने का आंकड़ा भी जबरदस्त बढऩे लगा है। वर्तमान में देश में 2 लाख से अधिक संक्रमित मरीज हैं, वहीं लगभग 9 हजार कोरोना संक्रमित मरीज प्रतिदिन मिल रहे हैं। आगे चलकर और कितनी भयावह स्थिति होगी इसका तो अंदाजा लगाने का सोचते से ही रूह कांप उठती है। अभी भी यह कहा जा रहा है कि जून-जुलाई में कोरोना अपने पीक पर होगा। मसलन अगर यही स्थिति बनी रही तो निश्चित रूप से मौतों का आंकड़ा भी बढ़ते जाएगा। वर्तमान में कोरोना को लेकर सोशल मीडिया में पर चल रहे वार्तालाप में किसी ने बेहद सटीक बात लिखी है- वह यह है कि
कोरोना के लिए अब पीएम ने अपना जिम्मा सभी राज्यों के सीएम पर छोड़ दिया है। सभी सीएम ने सभी जिले के डीएम पर, सभी डीएम ने नगर और जिला प्रशासन पर, नगर प्रशासन ने दुकानदारों पर और दुकानदारों ने लोगों पर और लोगों ने खुद को ना चाहते हुए भगवान के भरोसे छोड़ दिया है क्योंकि उसको अपना व अपने परिवार का जीवन भी बचाना है और जीविकोपार्जन भी बचाना है। इसके साथ ही उसे इस बात के लिए भी लगातार जागरूक रहते हुए संघर्ष भी करना है ताकि वह सुरक्षित रह सकें। चलते-चलते यहां पर यह जिक्र करना भी लाजमी है कि बैतूल और मुलताई के कपड़ा व्यापारियों ने स्वप्रेरणा से शाम 7 से 7:30 बजे तक दुकान बंद करने का निर्णय लेकर यह जता दिया है कि अब आदेश-निर्देश नहीं बल्कि स्वप्रेरणा से ही काम करना होगा ताकि जीवन भी बचा रहे और जीविकोपार्जन भी होती रही। कपड़ा व्यापारियों की तरह ही अन्य व्यापारी संगठनों को भी एकजुट होकर इस तरह के निर्णय लेने की आवश्यकता है ताकि उनका निर्णय समाजहित में नजीर बन सकें। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शायद सही कहा है कि देश खुल गया, अब एतिहात ही सबसे बड़ा हथियार, अब हमें और ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत है। दो गज की दुरी, मास्क लगाना इसमें ढिलाई नहीं होनी चाहिए, मतलब साफ है अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।

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