विधानसभा उपचुनाव में चाणक्य, मैनेजमेंट गुरु और PK की क्या है पहेली?

भोपाल. मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी गलियारों में चाणक्य, मैनेजमेंट गुरु और पीके की चर्चा तेज हो गई है. राजनीति के जानकार यह मान कर चल रहे हैं कि इस पहेली के पीछे ही दरअसल उपचुनाव का असली खेल छिपा हुआ है. अब आप यह सोच रहे होंगे कि उपचुनाव में चाणक्य, मैनेजमेंट गुरु और पीके की पहेली आखिरकार है क्या ? दरअसल, इसकी शुरुआत कांग्रेस के पूर्व जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस राजनीति और चुनाव के माहिर रणनीतिकार माने जाने वाले प्रशांत किशोर की मदद लेगी. इस पर मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के एक चाणक्य थे जो फेल हो गए और दूसरे मैनेजमेंट गुरु थे वह भी फेल हो गए. अब कांग्रेस चाहे किसी की भी मदद ले ले लेकिन उसका विधानसभा उपचुनाव में सूपड़ा साफ होना तय है.

चाणक्य और मैनेजमेंट गुरु
चाणक्य और मैनेजमेंट गुरु का संबंध कांग्रेस के दो दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से है. दरअसल, कांग्रेस नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को राजनीति का चाणक्य मान कर चलते हैं. यह कहा जाता है कि उनकी चुनावी और राजनीतिक रणनीति को समझना बेहद मुश्किल है. कांग्रेस का एक खेमा तो यहां तक मानता है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार जाने की वजह कहीं ना कहीं दिग्विजय सिंह थे. वहीं, दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की छवि राष्ट्रीय स्तर पर ऐसे नेता की है जो पॉलिटिकल मैनेजमेंट करने में माहिर माने जाते हैं, बावजूद इसके पिछले दिनों हुए राजनीतिक खेल में वह अपनी सरकार बचा पाने में कामयाब नहीं हो पाए.

प्रशांत किशोर की मंजूरी का इंतजार

कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने भले ही यह कहा हो कि कांग्रेस विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की मदद लेगी, लेकिन उनकी (प्रशांत किशोर) की ओर से अभी तक ऐसी कोई पुष्टि नहीं हुई है जिसमें उन्होंने यह कहा हो कि वह मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की मदद करेंगे. आपको बता दें कि प्रशांत किशोर वही चुनावी रणनीतिकार हैं जो कभी बीजेपी के साथ रहकर प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव कैंपेन की कमान संभाल चुके हैं.

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