चंद्र ग्रहण से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा से बचाएगी ‘कुशा’, ऐसे करें प्रयोग

ज्योतिष में किसी भी प्रकार के ग्रहण को शुभ नहीं माना गया. जब ग्रहण की स्थिति बनती है तो ग्रह पीड़ित हो जाता है. ग्रहण के दौरान कई तरह की ऊर्जा का निकलती है. इनमें नकारात्मक ऊर्जा भी शामिल होती है जो व्यक्ति पर अशुभ प्रभाव डालती है.

30 दिन में 3 ग्रहण
5 जून से लेकर 5 जुलाई का समय खागोलीय घटना के लिहाज से बहुत ही ध्यान देने वाला है. इस माह की अवधि में तीन ग्रहण लग रहे है. एक माह में तीन ग्रहण लगना अच्छा संकेत नहीं माना जाता है. 5 जून को चंद्र ग्रहण के बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लग रहा है इसके बाद 5 जुलाई को फिर चंद्र ग्रहण की स्थिति बन रही है.

भारत में दिखाई देगा चंद्र ग्रहण
5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण भारत में भी दिखाई देगा. इसे उपच्छाया चंद्र ग्रहण भी कहा जा रहा है. ग्रहण की शुरूआत 5 जून की रात 11:16 बजे से होगी. ग्रहण की समाप्ति 6 जून को 02:32 मिनट पर होगी. ग्रहण का सबसे अधिक प्रभाव रात 12:54 बजे होगा.

ऐसा दिखेगा चंद्रमा
ग्रहण के समय चंद्रमा के आकार में परिवर्तन नहीं होगा लेकिन इसकी छवि मटमैली सी नजर आएगी. ग्रहण के समय तेज आंधी चलती है. जिस कारण इसकी छवि सफेद नजर नहीं आएगी.

सूतक काल
उपच्छाया होने के कारण इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल नहीं है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार वास्तविक ग्रहण  होने पर ही सूतक काल मान्य होता है. लेकिन इसके नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए उपाय करने चाहिए.

‘कुशा’ का प्रयोग करें
‘कुशा’ एक प्रकार की वनस्पति होती है. जो आसानी से उपलब्ध रहती है. मान्यता है कि ग्रहण के समय का ‘कुशा’ के आसान पर बैठने या शरीर पर रखने से ग्रहण की नकारात्मक ऊर्जा से बचा जा सकता है. क्योंकि ‘कुशा’ को ऊर्जा का कुचालक माना गया है. ग्रहण के समय पानी और भोजन में इसे डालने से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव खत्म हो जाता है.

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