रेत खनन पर एनजीटी ने हटाई रोक, 38 जिलों में फिर शुरू होगी खदानों से निकासी

भोपाल। प्रदेश में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा रेत उत्खनन पर लगाई रोक हटा ली गई है। सोमवार को एनजीटी बैंच ने मामले पर सुनवाई करते हुए प्रदेश सरकार को बड़ी राहत दी है। मामला रेत खनन को लेकर पर्यावरण स्वीकृति का था। दरअसल, याचिका में बताया गया था कि बीते साल टेंडरों के आधार पर रेत का खनन किया जा रहा है। जबकि इन्हें नई पर्यावरण स्वीकृति लेनी चाहिए। याचिका में तय अवधि में निर्धारित मात्रा से अधिक खनन का दावा किया गया था। इस पर एनजीटी ने बीते 3 मार्च को रेत खनन पर रोक लगा दी थी। इस पर सरकारी अधिवक्ता ने तर्क दिया कि पर्यावरण स्वीकृति के हस्तांतरण का भी नियम है। जो बात याचिकाकर्ता ने बैंच को नहीं बताई। इसके बाद खनन संबंधित नियमों का खाका भी एनजीटी में प्रस्तुत किया गया।
सरकारी अधिवक्ता इनोश जार्ज कारलो ने बताया कि रेत खनन को लेकर ग्रीन एंड ग्रीन लायर्स संस्था द्वारा याचिका दर्ज कराई गई थी। इस याचिका में खनन संबंधित सभी नियमों को बैंच से छिपाया गया। लिहाजा एनजीटी ने एक पक्षीय कार्रवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रेत खनन पर रोक लगा दी। लिहाजा मामले पर तत्काल सुनवाई के लिए एनजीटी बैंच से आग्रह किया गया। सुनवाई के दौरान बैंच को खनन के बाद रेत परिवहन के लिए सरकार द्वारा ट्रांजिस्ट पास की व्यवस्था की गई है। इसके बिना संबंधित खदान से रेत को बाहर नहीं निकाला जा सकता। पर्यावरण स्वीकृति में तय मात्रा पर खनन के बाद यह पास ऑनलाइन जारी होता है। लिहाजा, रेत खनन में गलती या मात्रा से अधिक खनन का प्रश्न ही नहीं उठता।

याचिकाकर्ता संस्था ने जताई सहमति, 38 जिलों में बंद खनन का शुरू होगा काम
शासकीय अधिवक्ता ने सुनवाई के दौरान दलील में कहा कि रोक का आदेश विकास विरोधी है। इससे 38 जिलों में काम बंद हो गया है। हजारों मजदूरों के रोजगार पर भी संकट है। मानसून के दौरान रेत खनन का काम संभव नहीं है। लिहाजा, समय भी कम बचा है। मामले पर दलील, नियमों व कागजों को देखने के बाद याचिकाकर्ता संस्था ने इस पर सहमति जताई। इस पर एनजीटी ने मामले को खारिज दिया। लिहाजा, प्रदेश में फिर रेत खनन का काम शुरू हो सकेगा।

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