बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते पेरेंट्स, रखी ये शर्त! 24 घंटे में…

नई दिल्ली. कोरोना वायरस के चलते देश में लागू किया गया लॉकडाउन 4.0 अब खत्म हो चुका है. जनजीवन को पटरी पर लाने की कोशिश लगातार जारी हैं. इस कड़ी में 16 मार्च से बंद पड़े देशभर के स्कूल-कॉलेज समेत अन्य शिक्षण संस्थानों को दोबारा से खोलने की प्रकिया शुरू करने पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है. केंद्र सरकार ने भी साफ कर दिया है कि स्कूल-कॉलेज दोबारा खोलने को लेकर जुलाई में कोई फैसला लिया जा सकता है. इस बीच, देशभर के पेरेंट्स जुलाई में स्कूल खोले जाने को लेकर एकजुट होते नजर आ रहे हैं.

24 घंटे में 2 लाख से अधिक पेरेंट्स जुड़े
दरअसल, केंद्र सरकार के अनुसार स्कूल-कॉलेज दोबारा खोलने पर फैसला सभी हितधारकों से बात करके जुलाई में लिया जाएगा. ऐसे में अब पेरेंट्स की मानें तो वे स्थिति सामान्य होने तक स्कूल खोले जाने के पक्ष में नहीं हैं. इसे लेकर ऑनलाइन याचिका की मुहिम चलाई गई है, जिसमें पेरेंट्स ने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए शर्त रखी है. 24 घंटे में ही इस मुहिम से देशभर के दो लाख से अधिक पेरेंट्स जुड़ गए हैं और इनकी तादाद लगातार बढ़ती जा रही है.

नो वैक्सीन, नो स्कूल…

पेरेंट्स एसोसिएशन ने एक ऑनलाइन याचिका change.org title- No Vaccine, no school. (Online Petition) शुरू की है. इसके तहत नो वैक्सीन और नो स्कूल का नारा दिया गया है. 24 घंटे में ही इस याचिका पर 2 लाख से अधिक पेरेंट्स के हस्ताक्षर दर्ज हो चुके हैं. याचिका में कहा गया है कि स्कूल तब तक दोबारा नहीं खोले जाने चाहिए जब तक राज्य में कोविड19 के मामले शून्य न हो जाएं या फिर कोरोना की कोई वैक्सीन न आ जाए.

ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखी जाए…
याचिका में स्कूलों और कॉलेजों को हालात सामान्य होने तक बंद रखने की मांग की गई है. ऐसे में जबकि देश में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, तो पेरेंट्स अपने बच्चों को स्कूल भेजे जाने के पक्ष में नहीं हैं. इसकी बजाय पेरेंट्स जितना अधिक समय तक संभव हो सके, ऑनलाइन पढ़ाई को ही जारी रखना चाहते हैं.

जुलाई में स्कूल खोलना आग से खेलने जैसा
याचिका में कहा गया है कि जुलाई में स्कूल खोलने का फैसला लेना सरकार का सबसे खराब निर्णय होगा. ये आग से खेलने जैसा है. मौजूदा एकेडमिक सीजन में ऑनलाइन पढ़ाई जारी रखनी चाहिए. इसके अनुसार, अगर स्कूल दावा कर रहे हैं कि वो वर्चुअल लर्निंग के माध्यम से अच्छा काम कर रहे हैं तो इसे बाकी के एकेडमिक सीजन में जारी रखने में भला क्या परेशानी है. क्यों नहीं इसे बाकी एकेडमिक सीजन में भी जारी रहने दिया जाए.

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