कारोबारियों को जीएसटी में मिल सकती है बड़ी राहत! 14 जून को हो सकता है ये फैसला

नई दिल्ली. 3 महीने के बाद होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में कारोबारियों को राहत देने लिए बड़ा ऐलान हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी 2020 तक फाइल नहीं किए गए रिटर्न की लेट फीस पर जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में चर्चा होगी. सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम (CBEC) की तरफ से यह जानकारी दी गई है. आपको बता दें कि कोविड-19 महामारी आउटब्रेक के बाद जीएसटी काउंसिल की यह पहली बैठक होगी. जीएसटी काउंसिल की बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री अध्यक्षता करेंगी. साथ ही अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ​प्रतिनिधि भी शामिल होंगे. 25 मार्च को देशभर में लॉकडाउन लगने के बाद से ही टैक्स कलेक्शन में भारी कमी आई है.
कारोबारियों को मिल सकती है बड़ी राहत- जीएसटी की व्यवस्था जुलाई 2017 में लागू हुई थी. कई व्यापारियों ने तब से जीएसटीआर 3बी रिटर्न फाइल नहीं किया है.
ऐसे में उन्हें लेट फीस चुकानी पड़ेगी. ये लोग कफी समय से लेट फीस से माफी की मांग कर रहे हैं. सीबीआईसी ने सोमवार शाम इस मसले पर ट्वीट किया है.
सीबीआईसी ने ट्वीट में कहा है कि पिछले कुछ समय से यह देखा जा रहा है कि जीएसटीआर 3बी रिटर्न नहीं दाखिल करने पर लगने वाली लेट फीस माफ कर देने की मांग की जा रही है.
उसने कहा है कि जीएसटी से जुड़े सभी फैसले जीएसटी काउंसिल की मंजूरी के बाद केंद्र और राज्यों की सरकारें लेती हैं.
ऐसे में इस मसले पर सिर्फ केंद्र सरकार फैसला नहीं ले सकती है. उसने कहा है कि कारोबार से जुड़े लोगों को सूचित किया जाता है कि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में इस मसले पर चर्चा होगी.
लग सकता है आपदा सेस- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आपदा सेस लगाने को लेकर सूत्रों ने बताया कि कोविड-19 की वजह से पैदा हुए मौजूदा स्थिति में ऐसा कोई भी फैसला लेना घातक साबित हो सकता है. उन्होंने बताया कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव सेल्स आंकड़ों के लिए ‘कांउटर प्रोडक्टिव’ होगा. पहले से ही मांग और खपत कम होने की वजह से इसमें भारी गिरावट आ चुकी है. किसी भी तरह के सेस लगाने से वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाएंगी और इससे सेल्स पर असर पड़ेगा.
मार्च में हुई थी जीएसटी काउंसिल की अंतिम बैठक-सूत्रों ने जानकारी दी है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक 14 जून को वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होगी. इसके पहले जीएसटी काउंसिल की 39वीं बैठक मार्च में भी कोरोना वायरस को लेकर अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चर्चा हुई थी. उस दौरान भारत में कोरोना वायरस के मामले बेहद कम थे और लॉकडाउन का भी फैसला नहीं लिया गया था.

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