MP के सेक्स स्कैंडल Honey trap केस में कौन रोक रहा है SIT का रास्ता? 110 दिन बाद भी चार्जशीट पेश नहीं

भोपाल. मध्य प्रदेश के बहुचर्चित हाई प्रोफाइल हनीट्रैप मामले से जुड़े मानव तस्करी केस में सरकारी सुस्त चाल सामने आई है. इसी चाल की वजह से श्वेता स्वप्निल जैन को दोषमुक्त किए जाने के 110 दिन बाद भी SIT हाईकोर्ट नहीं पहुंची पायी है, जबकि एसआईटी को सिर्फ 90 दिन का समय मिला था. इस संबंध में फाइल कलेक्ट्रेट और विधि विभाग के बीच अटकी हुई है, इसलिए SIT इस केस में आगे नहीं बढ़ पा रही.
हनी ट्रैप मामले में एक छात्रा को भी आरोपी बनाया गया था. बाद में वो सरकारी गवाह बन गयी.इस छात्रा के पिता जो राजगढ़ में रहते हैं, उनकी शिकायत पर भोपाल में बाक़ी के आरोपियों पर मानव तस्करी की एफ आई आर दर्ज की गई. आरोप लगाए गए कि श्वेता स्वप्निल जैन समेत दूसरे आरोपियों ने बहला-फुसलाकर छात्रा को इस धंधे में डाला था. सीआईडी ने स्थानीय पुलिस की मदद से इस पूरे मामले की जांच की और कोर्ट में चार्जशीट सीट भी पेश की.
सेशन कोर्ट ने किया था दोषमुक्त.
भोपाल में सेशन कोर्ट ने आरोपी श्वेता स्वप्निल जैन को 12 फरवरी को दोषमुक्त कर दिया था. सेशन कोर्ट के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने के लिए कानून में प्रावधान 90 दिन का है. लेकिन एसआईटी मानव तस्करी के इस केस में दोष मुक्त हुई आरोपी के मामले में 110 दिन के बाद में हाईकोर्ट नहीं पहुंची.
कलेक्टर, विधि विभाग में अटकी फ़ाइल
लेटलतीफी के कारण अभिमत की फाइल विधि विभाग और कलेक्टर के पास अटकी हुई है. श्वेता स्वप्निल जैन 12 फरवरी 2020 को दोषमुक्त हुई थी. एसआईटी को इस दोष मुक्त करने के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका पेश करनी थी. जानकारी मिली है कि पुनरीक्षण याचिका 25 फरवरी को कलेक्टर कार्यालय भेजी गई थी. कलेक्टर के अनुमोदन के बाद 7 मार्च को फाइल विधि विभाग भेजी गई. विभाग ने 13 मार्च को कलेक्टर से कुछ दस्तावेज मांगे थे जो आज तक उसे नहीं दिए गए. कलेक्टर कार्यालय और विधि विभाग के बीच फाइल अटकी हुई है.

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