ज्येष्ठ अमावस्या 22 को, घर में शनि पूजा के साथ ही पितरों के लिए भी करें धूप-ध्यान

स्नान करते समय पवित्र नदियों के नामों का जाप करें, जरूरतमंद लोगों को अनाज का दान करें

शुक्रवार, 22 मई को शनि जयंती है। प्राचीन समय में ज्येष्ठ मास की अमावस्या पर शनिदेव का जन्म हुआ था। इस तिथि पर शनि पूजा के साथ ही पितरों के लिए भी विशेष धूप-ध्यान करना चाहिए। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार हर माह अमावस्या पर पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण कर्म करना चाहिए। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है। अभी नेशनल लॉकडाउन की वजह से नदी स्नान करने से बचें। घर पर ही पवित्र नदियों के नामों का जाप करते हुए स्नान करें।

पितरों के लिए करें धूप-ध्यान

अमावस्या तिथि पर एक लोटे में जल भरें, जल में फूल और तिल मिलाएं। इसके बाद ये जल पितरों को अर्पित करें। जल अर्पित करने के लिए जल हथेली में लेकर अंगूठे की ओर से चढ़ाएं। कंडा जलाकर उस पर गुड़-घी डालकर धूप अर्पित करें। पितरों का ध्यान करें।

घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को दान करें

अमावस्या पर जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं। अभी लॉकडाउन की वजह से काफी लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसी स्थिति में घर के आसपास जरूरतमंद लोगों को अपने सार्मथ्य के अनुसार अनाज और वस्त्र का दान भी करें। गर्मी से बचाने वाली चीजें जैसे छाते का दान करें। जिन लोगों के पास जूते-चप्पल नहीं है, उन्हें ये चीजें दान करें।

शुक्रवार और अमावस्या का योग

शुक्रवार और अमावस्या के योग में सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाएं। देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें।

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