उपचुनाव से पहले ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर BJP का मास्टर स्ट्रोक, कांग्रेस ने बोला पलटवार

भोपाल. प्रदेश में बनने वाले चंबल एक्सप्रेस वे को लेकर सियासत छिड़ गई है. बीजेपी ने चंबल एक्सप्रेस वे का नाम बदलकर चंबल प्रोग्रेस कर दिया है. सीएम शिवराज के इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू करने और इसके लिए जल्दी ही भूमि पूजन करने के ऐलान के बाद प्रदेश का सियासी पारा गर्म हो गया है. 24 सीटों पर उपचुनाव के कारण सरकार इसे लेकर हड़बड़ी में दिखाई दे रही है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि चंबल एक्सप्रेस वे बनाने का जो फैसला बीजेपी सरकार ने पिछले कार्यकाल में किया था उसे कांग्रेस सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया था. अब प्रदेश की बीजेपी सरकार एक नए प्रारूप में चंबल एक्सप्रेस वे को चंबल प्रोग्रेस वे के नाम से तैयार करेगी. राज्य सरकार के मुताबिक चंबल के विकास के लिए यह महा पथ होगा। इसके जरिए औद्योगिक इकाइयां और व्यापारिक व्यवस्थाएं बनाई जाएंगी. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से राज्य सरकार ने सहमति ले ली है.

‘झूठ बोल रहे हैं शिवराज-सिंधिया’
कांग्रेस ने चंबल एक्सप्रेस वे को लेकर सीएम शिवराज के बयान पर जवाबी हमला बोला है.पूर्व पीडब्लूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा -चंबल एक्सप्रेस वे को लेकर सीएम शिवराज और ज्योतिरादित्य सिंधिया झूठ बोल रहे हैं. चंबल एक्सप्रेस वे कांग्रेस के प्रयासों से शुरू हुई बहुआयामी योजना है. इसके लिए कांग्रेस ने हर स्तर पर प्रयास किए हैं.

क्या है चंबल एक्सप्रेस वे
केंद्र सरकार के भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत प्रदेश के मुरैना से राजस्थान के कोटा तक 352 किलोमीटर लंबा चंबल एक्सप्रेस-वे बनाया जाना है. इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाने और जमीन अधिग्रहित करने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है. लेकिन इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण बनवाएगा. चंबल एक्सप्रेस वे, से 3 राज्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को आपस में जोड़ा जाएगा. यह एक्सप्रेस वे 8 लेन का होग जो चंबल नदी के किनारे बनेगा.

क्यों मचा घमासान
ये प्रदेश के ग्वालियर चंबल इलाके के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है. अब प्रदेश के 24 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है. उसमें से सबसे ज्यादा 16 विधानसभा सीटें इसी ग्वालियर चंबल इलाके में हैं. इसलिए चुनाव के दौरान दोनों दल इसे बनवाने का क्रेडिट लेना चाहते हैं. इसलिए कोरोना संकट और लॉकडाउन के दौरान इस एक्सप्रेस वे के निर्माण की याद सरकार को आ रही है.

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