प्रियंका गांधी की ‘बस पॉलिटिक्स’, यूपी में कांग्रेस की एंट्री कराने की कोशिश?

लखनऊ। यूपी में प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर अखिलेश यादव भी लिख रहे हैं, मायावती भी लिख रही हैं लेकिन प्रियंका ने एक कदम आगे बढ़कर 1000 बसें चलवाने की पहल कर दी। यही नहीं अगले दिन यूपी बॉर्डर पर कांग्रेस की तरफ से मजदूरों को ले जाने वाली बसें भी खड़ी कर दीं। देर से ही सही प्रियंका की 1000 बसों के प्रस्ताव को योगी सरकार ने मंजूरी दी तो सवाल उठे कि आखिर धुर-विरोधी कांग्रेस की बात बीजेपी ने कैसे मान ली?
कुछ देर बाद यूपी सरकार ने नया दांव चलते हुए प्रियंका के निजी सचिव को पत्र लिखकर 1000 बसों को लखनऊ भेजने को कहा। कांग्रेस ने इसे ओछी राजनीति के साथ समय और संसाधन की बर्बादी बताया। देखा जाए तो इस पूरे एपिसोड में जहां प्रियंका की कोशिश यूपी में कांग्रेस को एंट्री कराने की है तो वहीं योगी आदित्यनाथ की कोशिश दो बड़े दल सियासी समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को सीन से पूरी तरह बाहर करने की।
बीजेपी ने साधा एक तीर से दो निशाना
सूत्र मानते हैं कि प्रियंका की बस पॉलिटिक्स से बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही फायदे में हैं। 2022 विधानसभा चुनाव के लिए जमीन खोज रही कांग्रेस मजदूरों के लिए अपनी पहल के चलते लगातार सुर्खियों में हैं तो वहीं योगी आदित्यनाथ सरकार ने कांग्रेस के प्रस्ताव को मानकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं। एक ओर सकारात्मक पॉलिटिक्स की राह दिखाई तो वहीं मंजूरी के साथ शर्तों से कांग्रेस को 1000 बसें चलाने की चुनौती दी है। इसके अलावा यूपी के दो मजबूत दल एसपी-बीएसपी की राजनीति को किनारे कर दिया है।
इसलिए योगी ने दी प्रियंका के प्रस्ताव को मंजूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, 2022 में यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं जिसमें बीजेपी अभी भी कांग्रेस को इतना मजबूत विपक्ष के रूप में नहीं देख रही है। बात करें 2017 विधानसभा चुनाव की तो समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने के बाद भी कांग्रेस को सिर्फ 7 सीटें मिली थीं। वहीं पिछले साल लोकसभा चुनाव में प्रियंका की राजनीति एंट्री के बाद भी यूपी में कांग्रेस एक सीट में सिमटकर रह गई थी। राहुल की अमेठी भी छिन गई थी। ऐसे में कांग्रेस के प्रस्ताव को तरजीह देने का मकसद अखिलेश और मायावती की राजनीति कमजोर करना है।
पहले भी प्रियंका की जिद के आगे झुकी थी सरकार
इससे पहले भी प्रियंका अपने दांव से बाकी दोनों विपक्षी दलों पर भारी पड़ती नजर आई हैं। फिर चाहे वह सीएए का मुद्दा हो या फिर सोनभद्र हत्याकांड में मारे गए लोगों के परिवार से मिलने का मामला हो, योगी सरकार भी प्रियंका की जिद के आगे झुकती नजर आई। पिछले साल सोनभद्र के उभा गांव में जमीन विवाद को लेकर हुई हिंसा में 10 लोग मारे गए थे। जब प्रियंका इनसे मिलने जाने लगीं तो उन्हें मीरजापुर में रोककर हिरासत में लिया गया। काफी मशक्कत के बाद मीरजापुर में ही चुनाव गेस्ट हाउस में प्रियंका को पीड़ित परिजनों से मुलाकात की इजाजत दी गई।
स्कूटी में बैठकर दारापुरी से मिलने गई थीं
इसी तरह पिछले साल दिसंबर महीने में जब सीएए को लेकर प्रदर्शन में कांग्रेस नेता सदफ जफर और रिटायर्ड आईपीएस अफसर एसआर दारापुरी को गिरफ्तार किया गया था तो प्रियंका उनसे मिलने स्कूटी से जा पहुंची थीं। पुलिस ने उनके काफिले को रोक दिया और आगे जाने की अनुमति नहीं दी थी। बावजूद इसके प्रियंका दारापुरी के परिवार से मिलने में सफल रही थीं।

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