ताई के पत्र से भाजपा में खलबली, माहौल संभालने की कोशिश

भोपाल। इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन द्वारा टिकट को लेकर चल रहे असमंजस को लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को लिखे पत्र ने पार्टी में खलबली मचा दी है। ताई ने पत्र लिखकर चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है पर पार्टी के नेता इसे दबाव बनाने की रणनीति तो मान ही रहे हैं, साथ ही ये भी कह रहे हैं कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस तरह के कदम से माहौल खराब होगा।
पार्टी अब तक टिकट से वंचित किए गए बोधसिंह और ज्ञानसिंह की नाराजी ही दूर नहीं कर पाई है। वे दोनों निर्दलीय चुनाव लड़ने पर अडिग हैं । पार्टी नेताओं की मानें तो ऐसी घटनाओं के कारण ही विधानसभा चुनाव में पार्टी का माहौल खराब हुआ था।
पार्टी नेताओं की मानें तो सुमित्रा महाजन के पत्र को हाईकमान ने प्रेशर पालीटिक्स माना है। ठीक उसी तरह जिस तरह बाबूलाल गौर ने अपनी टिकट कटने के दौरान पार्टी पर दबाव बनाया था और बहू कृष्णा गौर को टिकट दिलाने में सफल रहे थे। वहीं होशंगाबाद सीट पर पूर्व मंत्री सरताज सिंह के कांग्रेस ज्वाइन करने के कारण भी नुकसान झेलना पड़ा। दमोह में रामकृष्ण कुसमरिया के कारण भी आसपास की कई सीटों पर पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक ताई के पत्र के कारण मालवा में इसका असर पड़ेगा। पार्टी ने इसी डर से माहौल को संभालने की कोशिश शुरू कर दी है। कुछ दिग्गज नेताओं ने भी ताई से बातचीत की है। हाईकमान के भरोसेमंद एक वरिष्ठ नेता को भी इंदौर भेजा गया है।
ताई का सिंगल नाम भाजपा की प्रदेश चुनाव समिति ने हाईकमान को भेजा था लेकिन 75 साल के फार्मूले के कारण उनका नाम घोषित नहीं किया गया था। इधर ताई ने अपना चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था पर टिकट को लेकर चल रहे असमंजस से वे नाराज थीं। फिलहाल इस दायरे में सागर के सांसद लक्ष्मीनारायण यादव भी आ सकते हैं। उनकी उम्र को लेकर कुछ विरोधाभास है।
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता डा दीपक विजयवर्गीय कहते हैं कि पार्टी नामांकन की तारीख से पहले सारे टिकट जारी कर देगी। हमारे कार्यकर्ताओं ने पोलिंग बूथ संभाल लिए हैं, जहां तक नेताओं की अभिव्यक्ति की बात है तो वे स्वतंत्र हैं।

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