एक और बैल न मिला तो कंधे पर रखकर चलाई बैलगाड़ी, किसी फिल्म से कम नहीं ये सीन

इंदौर. देश में लागू लॉकडाउन और मजदूरों के पलायन के बीच कई बेहद दिल दहलाने वाली और मार्मिक तस्वीरें सामने आ रही हैं. इंदौर में पलायन कर रहे एक मजदूर को खुद बैल के साथ गाड़ी में जुतना पड़ा. मजबूरी ये थी कि काम धंधा बंद होने के कारण घर लौटना था और घर लौटने के लिए भी पैसे नहीं बचे थे. इसलिए एक बैल वो बेच चुका था और एक बैल के सहारे गाड़ी खींची नहीं जा सकती थी.
मजदूरों के पलायन के बीच ऐसी एक तस्वीर इंदौर के बायपास पर दिखी जिसे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं. चिलचिलाती धूप और तपती दोपहरी में एक मजदूर बैल गाड़ी को खींच रहा था. गाड़ी में एक तरफ बैल जुता था और दूसरी तरफ मजदूर. गाड़ी पर उसकी छोटी सी गृहस्थी और परिवार लदा था.
15 हजार का बैल 5 हजार में बेचा
बैल के साथ खुद को जोतने वाला ये श्रमिक राहुल है. वो महू का रहने वाला है. लेकिन रोजी-रोटी की तलाश में कुछ समय पहले इंदौर आ गया था. यहां उसने बैलगाड़ी खरीदी और हम्माली करने लगा. सब कुछ ठीक-ठाक ही चल रहा था कि इस बीच कोरोना के हमले ने इसकी पूरी ज़िंदगी ही तहस-नहस कर दी. देशभर में लॉक डाउन हुआ तो काम धंधा बंद हो गया. कुछ दिन तो जैसे-तैसे कट गए लेकिन धीरे-धीरे घर में रखे अनाज के दाने और जेब में रखी पाई-पाई भी ख़त्म हो गयी. लाचार-मजबूर राहुल क्या करता. उसने परेशान होकर गाड़ी में जुते एक बैल को बेच दिया. मजबूरी में बैल भी गया और उसकी वाजिब कीमत भी नहीं मिल पायी. 15 हजार का बैल उसे 5 हजार में बेचना पड़ा.
भाभी ने भी खींची गाड़ी
थोड़े पैसे का जुगाड़ हुआ तो राहुल ने अपने घर लौटने के लिए बोरिया-बिस्तर बांधा. लेकिन लौटे कैसे. कहीं-कोई और साधन नहीं है और गाड़ी में भी एक ही बैल रह गया था. ऐसे हालात में उसने दूसरे बैल की जगह खुद को ही जोत लिया. गाड़ी पर सामान और परिवार को बैठाया और भारी कदमों से घर लौट पड़ा. राहुल थक गया तो रास्ते में कुछ देर उसकी भाभी बैल के साथ गाड़ी में जुती और फिर गाड़ी खींची.

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