मध्य प्रदेश में 20 जून से हो सकती हैं कॉलेजों में परीक्षाएं, सितंबर से शुरू होगा नया सेशन

भोपाल. मध्य प्रदेश में इस बार विश्वविद्यालयीन परीक्षाएं 20 जून से शुरू हो सकती हैं. विश्वविद्यालयीन परीक्षा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को सौंप दी है. इसमें कमेटी ने सिफारिश की है कि सब कुछ ठीक रहा तो 20 जून से विश्वविद्यालयों में परीक्षा करायी जा सकती हैं. कोरोना के कारण अगस्त तक सेशन पूरा होगा और फिर सितंबर से नया सेशन शुरू हो सकेगा. हालांकि कमेटी की इस सिफारिश पर आखिरी मुहर राजभवन लगाएगा.

लॉक डाउन के कारण स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटी सहित सभी शैक्षणिक संस्थान पूरी तरह से बंद हैं. कॉलेज और विश्वविद्यालयों में परीक्षा की तारीख तय करने के लिए राज्यपाल ने 6 सदस्यीय कमेटी बनाई थी. कमेटी ने 6 पेज की रिपोर्ट शुक्रवार को राजभवन को भेज दी है.अब राजभवन रिपोर्ट की समीक्षा के बाद विश्वविद्यालयों को परीक्षा के संबंध में निर्देश जारी करेगा.

बीयू कुलपति निवास में हुई बैठक
राजभवन ने प्रदेश के कॉलेज और विश्वविद्यालयों की परीक्षा कराने और अकादमिक कैलेंडर तैयार करने के लिए छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया था. कमेटी को रिपोर्ट तैयार करने के लिए 8 मई तक का समय दिया गया था.बरकतउल्ला विश्वविद्यालय में हुई बैठक में भोज विश्वविद्यालय के कुलपति जयंत सोनवलकर, बीयू कुलपति आरजे राव आरजीवीपी कुलपति डॉ सुनील कुमार गुप्ता और प्रमुख सचिव नीरज मंडलोई शामिल हुए. जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर की कुलपति संगीता शुक्ला और अवधेश प्रताप सिंह रीवा के कुलपति पीयूष रंजन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुए. सभी ने बैठक में अपने अपने तर्क रखे. कमेटी ने 6पेज की रिपोर्ट तैयार कर राजभवन भेज दी है.

रिपोर्ट पर राजभवन से लगेगी अंतिम मुहर
प्रदेशभर में लॉक डाउन के कारण राज्यपाल लालजी टंडन ने कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई के निर्देश दिए थे. वो लगातार कुलपतियों से रिपोर्ट भी ले रहे हैं और मॉनिटरिंग कर रहे हैं.परीक्षाओं को लेकर जो रिपोर्ट 6 सदस्यीय कमेटी ने राजभवन को सौंपी है उस पर राजभवन समीक्षा करेगा और समीक्षा के बाद आवश्यक सुधार भी किए जाएंगे.कमेटी के निर्णय पर अंतिम मुहर राजभवन की होगी. उसके बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटी में परीक्षा को लेकर दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे.

20 जून से परीक्षा कराने की तैयारी
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में लॉक डाउन खुलने के बाद जून में परीक्षाएं कराने की सिफारिश की है. फाइनल ईयर के स्टूडेंट की परीक्षाएं जून के आखिरी हफ्ते यानी 20 जून से शुरू करने का प्रस्ताव है. जुलाई के महीने में यूजी और पीजी के फर्स्ट ईयर और सेकंड ईयर के छात्र छात्राओं की परीक्षाएं हो सकती हैं.सभी विश्वविद्यालय 10 अगस्त तक अपने रिजल्ट जारी करेंगे.उसके बाद सितंबर से नए सत्र की शुरुआत होगी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया है कि जो छात्र दूसरे जिलों में फंसे हैं और परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाएंगे वो पूरक परीक्षाओं के साथ शामिल हो सकते हैं.छात्रों को पूरक परीक्षा नहीं बल्कि मूल परीक्षाओं के तहत ही रखा जाएगा.

भोपाल के हालात पर फिर होगा विचार
लॉक डाउन खुलने के बाद ग्रीन और ऑरेंज श्रेणी वाले जिलों में इस समय के अनुसार ही परीक्षाएं आयोजित होंगी.भोपाल(रेड जोन) होने के कारण यहां की स्थिति को देखते हुए फैसला लिया जाएगा.अगर भोपाल रेड जोन से बाहर आता है तो परीक्षाएं तय समय पर ही होंगी.लेकिन अगर रेड जोन में ही भोपाल रहता है तो परीक्षाओं को लेकर कमेटी एक बार फिर से अपनी बैठक कर फैसला लेगी.

दो से तीन गुना परीक्षा केंद्र
अब तक विश्वविद्यालयों में जो परीक्षाएं आयोजित कराई जाती रही हैं,उसमें एक साथ दो हजार से ज्यादा छात्र छात्राएं एक ही परीक्षा केंद्र में बैठकर परीक्षा देते थे. लेकिन अब कोरोना वायरस के कारण स्थितियां पूरी तरह से बदल गई हैं.ऐसे में कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पहले की तुलना में दो से तीन गुना परीक्षा केंद्र तैयार किए जाएंगे.परीक्षा केंद्रों को हर पेपर से पहले सेनेटाइज़ किया जाएगा.परीक्षा के दौरान छात्र-छात्राओं को मास्क लगाना जरूरी होग और केंद्रों पर सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जाएगा. परीक्षा देने आने से पहले और बाद में छात्र-छात्राओं के लिए सेनिटाइजर की भी व्यवस्था परीक्षा केंद्रों पर की जाएगी.

ऑनलाइन परीक्षा में छात्र-छात्राओं की रुचि नहीं
राजभवन को अपनी रिपोर्ट सौंपने से पहले 6 सदस्य कमेटी ने एक सर्वे भी कराया था.इसमें छात्र-छात्राओं से ऑनलाइन और ऑफलाइन एग्जाम के बारे में पूछा गया था. सर्वे के मुताबिक छात्र छात्राओं ने ऑनलाइन एग्जाम कराने से इंकार कर दिया है. वो ऑफलाइन एग्जाम के लिए ही तैयार हैं.भले ही इसके लिए उन्हें लंबा इंतजार ही क्यों ना करना पड़े.

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