बिना बताए कोरोना मरीजों के जला दिए शव

  • ज्यादातर देशों में कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार के दौरान घरवालों को ही आने की परमिशन, ये लोग शव को देख तो सकते हैं लेकिन छूने की मनाही है
  • कुछ देशों में कोरोना संक्रमित शव को नहलाने और कपड़े पहनाने के लिए वॉलेंटियरों को ट्रेनिंग दी गई है, मृत व्यक्ति के परिजनों यह सब नहीं कर सकते
  • भारत में कोरोना संक्रमित शव को रिवाजों के हिसाब से जलाया या दफनाया जा रहा लेकिन इस अंतिम विदाई के पहले शव को नहलाने जैसी परंपराओं पर बैन हैं

नई दिल्ली. चीन के नेशनल हेल्थ कमीशन ने 2 फरवरी को एक आदेश जारी किया था, इसमें स्थानीय प्रशासन को कोरोना के मरीजों (चाहे वे किसी भी धर्म के हों) के शवों को जलाने के निर्देश दिए थे। इसमें शवों को हॉस्पिटल से ले जाकर अंतिम संस्कार करने तक क्या-क्या सावधानियां बरतनी हैं, वह भी बताया गया था। चीन सरकार के इस आदेश पर बड़ा विवाद हुआ था। मृत व्यक्ति के परिवारवालों के विरोध के बावजूद सरकार अपने आदेश पर कायम रही थी।

हालांकि, इस आदेश से पहले ही चीन के वुहान शहर में कोरोना से हो रही मौतों के बाद शवों को फौरन जला दिया जा रहा था। यहां तक कि वहां मृत व्यक्ति के परिवार के बिना ही अंतिम संस्कार किया जा रहा था। यहां घर के लोग अपनों की अस्थियां तक लेने हॉस्पिटल नहीं जा सकते थे।


ये कोरोना के शुरुआती प्रकोप का असर था कि चीन में सभी धर्म के लोगों का अंतिम संस्कार जलाकर ही किया जा रहा था। वैसे हिंदू धर्म में शव को जलाने की परंपरा रही है। सिख धर्म और बौद्ध धर्म में भी यही रिवाज है। लेकिन अब्राहमिक रिलिजियन (यहूदी, क्रिश्चियन और इस्लाम) में हमेशा से ही शवों को दफनाया जाता रहा है।

हां, कुछ ऐसी चीजें हैं जो इस दौरान हर समाज में एक जैसी होती हैं, जैसे उस शख्स को अंतिम विदाई देने के लिए परिवार, दोस्त, पड़ोसी समेत दूर-दूर के रिश्तेदारों का इकट्ठा होना, शव को नहलाकर नए कपड़े पहनाना, परिजनों का शव से लिपट-लिपटकर रोना। लेकिन इन दिनों अंतिम विदाई की ऐसे तस्वीरें दिखाईं नहीं दे रहीं।

खासकर कोरोना संक्रमित किसी शख्स के अंतिम संस्कार के लिए ये तरीके अब पूरी तरह बदल गए हैं…

ये तस्वीर यूरोपीय देश बेल्जियम की है। यहां मरने के बाद शव को दफनाया जाता है। लेकिन, कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का दफनाने की बजाय जलाकर अंतिम संस्कार किया गया।

चीन से निकलकर यह वायरस दुनिया के 200 से ज्यादा देशों में फैला। हर देश में चीन की तरह ही कोरोना संक्रमित व्यक्ति (जिंदा या मुर्दा) सरकार की प्रॉपर्टी हो गया। कोरोना संक्रमण का पता लगते ही व्यक्ति के सारे अधिकार खत्म कर दिए जाते हैं, उन्हें घर से उठाकर तुरंत क्वारैंटाइन कर दिया जाता है और इलाज के दौरान ही अगर वो मर जाता है तो उसका अंतिम संस्कार कैसे किया जाएगा वो भी सरकार ही तय करती है।


दुनियाभर में किसी कोरोना मरीज के अंतिम संस्कार पर जो तस्वीरें नजर आएंगी, उनमें कुछ मुठ्ठीभर लोग मास्क या पीपीई किट पहने नजर आएंगे। किसी देश में इन लोगों को शव को एक बार देखने की छूट है तो किसी देश में घरवालों को ये भी नसीब नहीं है। कहीं-कहीं पूरे रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार तो हो रहा है लेकिन उसके लिए वॉलेंटियर रखे गए हैं।

आमतौर पर अंतिम संस्कार में घरवालों को ढांढस बंधाती तस्वीरें नजर आती थीं यानी परिजन मृत व्यक्ति के घरवालों को गले लगाते या आंसू पोछते दिखाई देते थे लेकिन अब ये लोग करीब 6-6 फीट दूर खड़े नजर आते हैं। किसी-किसी देश में तो रिवाजों के मुताबिक अंतिम संस्कार करने की भी मनाही है। 


चीन की तरह ही श्रीलंका में भी कोरोना मरीज के शव को जलाने का ही आदेश है। मृत व्यक्ति अगर कोरोना नेगेटिव पाया गया हो लेकिन उसमें लक्षण इसी महामारी के हो तो भी उसे जलाया ही जा रहा है। यहां मुस्लिमों ने इस आदेश का विरोध भी किया लेकिन सरकार अपने आदेश पर कायम रही।

भारत में कोरोना संक्रमित मरीज की मौत के बाद घर वाले शव को देख तो सकते हैं, लेकिन छू नहीं सकते। अंतिम संस्कार में भी सिर्फ परिवार के लोग ही शामिल हो सकते हैं और सभी को पीपीई किट पहनना जरूरी है। (तस्वीर दिल्ली की है)

भारत सरकार कोरोना संक्रमित शव को जलाने और दफनाने दोनों की परमिशन देती है। हालांकि अंतिम संस्कार के लिए कुछ सख्त गाइडलाइन्स हैं। यहां कोरोना संक्रमित का शव प्रशिक्षित हेल्थ प्रोफेशनल ही ले जाते हैं। ये हेल्थ प्रोफेशनल पीपीई किट में होते हैं।

शव भी एक प्लास्टिक बैग में होता है। घर वाले शव को देख तो सकते हैं, लेकिन छू नहीं सकते। अंतिम संस्कार में शव को बिना छूए जो रिवाज हो सकते हैं, बस वही किए जा रहे हैं। इसके बाद सीधे शव को या तो जला दिया जाता है या दफना दिया जाता है। यहां सिर्फ परिवार के लोगों को ही अंतिम संस्कार में आने की अनुमति होती है और सभी को पीपीई किट पहनना जरूरी है।


हालांकि मुंबई नगर निगम ने मार्च में ही एक विवादित आदेश दिया था। इसमें महामारी एक्ट 1897 के तहत बीएमसी ने सर्कुलर जारी कर हर कोरोना संक्रमित शव को जलाने का आदेश दिया था। मुस्लिम और ईसाई समाज के लोगों ने इसका विरोध किया था। इसके बाद विवाद बढ़ने पर इस फैसले को वापस भी ले लिया गया था।


कोरोना संक्रमित शव के अंतिम संस्कार के लिए हर देश की अपनी गाइडलाइन्स हैं। वैसे डब्लूएचओ की गाइडलाइन्स के मुताबिक, रिवाजों के हिसाब से शव को दफनाया भी जा सकता है और जलाया भी। परिवार वाले मृत व्यक्ति को देख भी सकते हैं लेकिन उन्हें छू नहीं सकते। जो टीम शव को कब्र में डालती है या लकड़ी पर लेटाती है, उन्हें पीपीई किट में होना चाहिए और पूरी प्रक्रिया के बाद पीपीई किट फेंककर अपने हाथों को धोना चाहिए। इसमें अंतिम संस्कार के दौरान ज्यादा लोगों की भीड़ न करने की भी सलाह दी गई है।

ये तस्वीर इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता की है। यहां कोरोना संक्रमित की मौत के बाद उसके परिजन कई फीट दूर खड़े हैं और हेल्थ वर्कर्स उसके शव को दफना रहे हैं।

अमेरिका इस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित है। यहां फ्यूनरल के लिए सेंट्रल फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की गाइडलाइन्स के मुताबिक, लोगों को अपने रिवाजों के हिसाब से अंतिम संस्कार करने की परमिशन है लेकिन 10 से ज्यादा लोगों की भीड़ न करने की सलाह दी गई है। अमेरिका में नियम अन्य देशों के मुकाबले थोड़े लचीले हैं।

सीडीसी के मुताबिक, कोरोना संक्रमित शव को छूने से बचना चाहिए। वैसे हाथ-पैर को छूने से कोरोना फैलने का खतरा इतना ज्यादा नहीं है। लेकिन छूने के बाद अपने हाथ साबुन से 20 सेकंड तक धोने का कहा गया है। किसिंग, बॉडी को नहलाने जैसी चीजों को न करने की सलाह दी गई है।


यहां अगर किसी सभ्यता में नहलाने, बाल बांधने जैसी रिवाज जरूरी है, तो पीपीई किट पहनने की सलाह दी गई है। जिसमें गॉगल्स, फेस मास्क, ग्लव्स सभी शामिल हैं।


कोरोना के दूसरे सबसे ज्यादा प्रभावित देश ब्रिटेन में भी मृत व्यक्ति के परिवार वालों को ही फ्यूनरल में जाने की परमिशन होती है। हर देश की तरह यहां भी संक्रमित शव का जल्द से जल्द अंतिम संस्कार करने की एडवायजरी है।


मार्च में जब इटली में कोरोना से मौतें बढ़ने लगी तो यहां अंतिम संस्कार के लिए सख्त नियम बने। हॉस्पिटल से ही डेड बॉडी को कॉफिन में रखकर बाहर निकाला जाता है। 2 से 4 रिश्तेदार ही इस दौरान साथ होते हैं। किसी को शव देखने की भी अनुमति नहीं है। आमतौर पर मृत व्यक्ति को उसकी पसंद के कपड़े पहनाकर अंतिम विदाई देने की यहां परंपरा रही है लेकिन कोरोना मरीजों को हॉस्पिटल के गाउन में ही दफनाया जा रहा है। यहां फ्यूनरल हाउसेस के लोग ही परिवार वालों द्वारा दिए गए कपड़े शव के ऊपर रख देते हैं।


ईरान में तो यह हालत थी कि लाशें ट्रकों में आ रहीं थीं और इन्हें बिना इस्लामी रिवाज पूरे किए सीधे दफनाया जा रहा था। हालांकि बाद में परिजनों के सामने गहरा गड्ढा खोदकर शव को दफनाया जाने लगा। 


दक्षिण कोरिया में किसी की मौत हो जाने पर तीन दिन तक प्रार्थना सभाएं और दावतें होती हैं। आमतौर पर हॉस्पिटल में ही अंतिम संस्कार होता है। अब मुठ्ठीभर लोग ही शोक सभाओं में आते हैं और अपनी संवेदना देकर चले जाते हैं।

ये तस्वीर इराक की है। यहां कोरोना से मरने वाले लोगों को दफनाने के लिए नजफ शहर से 20 किमी दूर कब्रिस्तान बनाया गया है।

यहूदियों में भी शवों को नहलाकर नए कपड़े पहनाने का रिवाज होता है। इजरायल में पहले इस रिवाज पर बैन लगाया गया लेकिन बाद में कोरोना संक्रमितों के शवों को नहलाने और कपड़े पहनाने की परमिशन दी गई लेकिन ये काम घर के लोग नहीं बल्कि वॉलेंटियरों द्वारा किया जाता है।

इजरायल की हेल्थ मिनिस्ट्री की गाइडलाइन्स के मुताबिक अंतिम संस्कार के लिए यहां महिला और पुरुष वॉलेंटियरों को तैयार किया गया है। यहां घर वालों को मृत व्यक्ति का चेहरा देखने की परमिशन है। फ्यूनरल में आने वाले लोगों को भी पीपीई किट पहनना जरूरी है।


तुर्की में भी कुछ इसी तरह का नजारा दिखता है। यहां कोविड मरीज के शव को दफनाने से पहले नहलाए जाने की परमिशन तो है लेकिन ये काम परिवार वाले नहीं बल्कि कब्रिस्तान वालों के जिम्मे ही होता है। ये पूरी सतर्कता के साथ अंतिम रिवाज पूरे करवाते हैं। इमाम भी मास्क लगाकर बहुत दूर से प्रार्थना करते हैं।


आयरलैंड में भी चर्च के अंदर जाने की मनाही है। ऐसे में लोग बाहर दूर-दूर खड़े होकर लोगों को अंतिम विदाई देते देखे जा रहे हैं। 


सभी देशों में फ्यूनरल पर कम से कम लोगों को आने के लिए कहा गया है। फ्रांस और ब्राजील जैसे देशों में यह संख्या 10 तक सीमित कर दी गई है। फिलीपींस में तो कोरोना मरीज को 12 घंटे के अंदर दफनाने के आदेश हैं।

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