क्या आपको मिलेगा सबसे पहले कोरोना का वैक्सीन? यहां जाने सबकुछ

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया की कोई भी दवाई अभी तक कारगर साबित नहीं हुई है। माना जा रहा है कि अब वैक्सीन ही इस महामारी से दुनिया को बचा सकती है। यही वजह है कि इसकी वैक्सीन बचाने के लिए दुनियाभर में युद्धस्तर पर काम हो रहा है। पूरी दुनिया को कोराना से बचाने के लिए वैक्सीन की कम से कम 7 अरब डोज चाहिए। तमाम रिसर्च संस्थान इसका टीका बनाने में लगे हुए हैंं। अब सवाल उठता है कि अगर वैक्सीन बनती तो यह सबसे पहले किसे मिलनी चाहिए?

गेट्स की संस्था भी वैक्सीन की रेस में
दुनिया के सबसे अमीर व्यक्तियों में से एक और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की संस्था भी कोरोना की वैक्सीन बनाने की रेस में हैं। उनका कहना है कि सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को इसकी डोज मिलनी चाहिए। उसके बाद गरीब देशों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जहां इसका खतरा सबसे अधिक है। गेट्स का कहना है कि दुनिया के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती कोरोनावायरस के खिलाफ इम्युनिटी विकसित करने की है। उनका कहना है कि वैक्सीन के जरिये ऐसा किया जा सकता है। उनकी संस्था बिल एंड मेलिंडा फाउंडेशन वैक्सीन बनाने के लिए दुनिया में सबसे अधिक पैसा देती है।

कोरोना की वैक्सीन के लिए एकसाथ कई परीक्षण
गेट्स ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि वैक्सीन विकसित करने के लिए वैश्विक स्तर पर अभूतपूर्व सहयोग की जरूरत है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोनावायरस की वैक्सीन विकसित करने में 18 महीने का समय लग सकता है। लेकिन गेट्स कहते हैं कि यह 9 महीने में भी बन सकती है और इसमें दो साल भी लग सकते हैं।
अगर वैक्सीन बनने में 18 महीने भी लगते हैं, तब भी यह किसी वैक्सीन के लिए रिकॉर्ड समय होगा। अभी यह रिकॉर्ड 5 साल का है। वैक्सीन को विकसित करने में बहुत समय लगता है क्योंकि इसमें बहुत खर्च होता है। इसके परीक्षण के हर चरण के नतीजों को पक्का करने में बहुत समय लगता है। लेकिन कोविड-19 वैक्सीन के मामले में समय बचाने के लिए कई चरणों का परीक्षण एक साथ किया जा रहा है।

वैक्सीन के लिए मिलेगी मानकों में ढील?
गेट्स का कहना है कि अगर वैक्सीन 70 फीसदी कारगर साबित होती है तो यह कोविड-19 को रोकने के लिए पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि 60 फीसदी कारगर वैक्सीन से काम चलाया जा सकता है लेकिन इससे स्थानीय स्तर पर यह फिर से सिर उठा सकता है। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के लिए सबसे जरूरी है उसका कारगर और सुरक्षित होना। चूंकि इसके व्यापक अध्ययन के लिए समय नहीं है, इसलिए सुरक्षा मानकों में थोड़ा ढील दी जा सकती है।

2 खुराक, तो चाहिए 14 अरब डोज!
दुनिया को कोरोना से सुरक्षित रखने के लिए वैक्सीन की कम से कम 7 अरब डोज चाहिए। पूरी दुनिया की आबादी को वैक्सीन देनी होगी। अगर यह दो खुराक वाली वैक्सीन होगी तो 14 अरब डोज की जरूरत होगी। गेट्स ने कहा कि वैक्सीन के बारे में विस्तृत ब्योरे के बिना निर्माण सुविधाओं को विकसित करना मुश्किल होगा। उन्होंने सुझाव दिया कि विभिन्न प्रकार की वैक्सीन फैक्टरी बनाने का काम शुरू कर देना चाहिए ताकि वैक्सीन को मंजूरी मिलने पर जल्दी से जल्दी इसका उत्पादन शुरू हो सके।

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