प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक की मौजूदगी में भी डिजिटल मीडिया ने बनाई अलग पहचान

इंदौर। प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की मौजूदगी के बाद भी डिजिटल मीडिया ने तेजी से अपनी पहचान बनाई है। इसकी बदौलत खबरों का दायरा बढ़ गया है। खास बात यह है कि छोटे शहर की खबरें भी आज विदेशों तक आसानी से पहुंच रही हैं और पाठक इसे रुचि लेकर पढ़ रहे हैं। आधुनिक टेक्नोलॉजी को हर क्षेत्र अपना रहा है, ऐसे में वह दिन दूर नहीं, जब कक्षाएं डिजिटल होंगी।
जिससे विद्यार्थी भी पढ़ाई में खासी दिलचस्पी लेंगे। यह बात बतौर मुख्य अतिथि देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. नरेंद्र धाकड़ ने विवि के पत्रकारिता विभाग में कही। गुरुवार को विभाग में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसका विषय ‘डिजिटल मीडिया और हिंदी : संभावनाएं और चुनौतियां’ है।
गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष उमेश आर्य ने कहा कि पुराने पत्रकारों के पास पत्रकारिता की डिग्री नहीं होती थी, लेकिन जानकारी पूरी होती थी, मगर आज पत्रकारों के पास डिग्री तो होती है, लेकिन जानकारी नहीं होती है। यह उल्टा काम हो रहा है। यूट्यूब के कारण अब जानकारी हमारे पास ओवरलोड है। लेकिन हमें यह नहीं मालूम है कि इसमें से हमारी उपयोग की जानकारी कौन सी है और उसे हमें किस तरह से प्राप्त करना है।
विषय विशेषज्ञ के रूप में संजीव गुप्ता (माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल), कला जोशी (अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय महाविद्यालय, इंदौर) एवं जयति मिश्रा (एमिटी यूनिवर्सिटी,जयपुर) मौजूद रहे।
नईदुनिया डॉट कॉम के कार्यकारी संपादक सुधीर गोरे ने कहा कि वर्ष 2016-18 के दौर में एंड्रॉयड एप्लीकेशन ने यूजर को इंफॉर्मेशन के हाईवे पर लाकर खड़ा कर दिया है। रेडियो को 50 लाख लोगों तक पहुंचने में 8 वर्ष का समय लगा था, जबकि इंटरनेट को 50 लाख लोगों तक पहुंचने में केवल दो साल का समय लगा। साथ ही टेलीकम्युनिकेशन को जनता के बीच पहुंचने में 13 साल का लंबा समय लगा है। आज हमारे देश में 80% रीडर मोबाइल पर उपलब्ध है। पत्रकारिता के लिए कंटेंट सोर्स रेलीवेंसी और क्वालिटी की जरूरत है।
हिंदी पोर्टल पर 90 फीसदी रीडरशिप
फिल्म पत्रकारिता से जुड़े समय ताम्रकर ने कहा भारत में पोर्टल का भविष्य बहुत उज्जवल है। हर दिन 90% से ज्यादा रीडरशिप हिंदी पोर्टल की बढ़ती जा रही है। गूगल को भी यह बात समझ में आ गई है। यही कारण है कि आप बहुत तेजी के साथ पोर्टल्स का विकास हो रहा है। अंग्रेजी में मात्र 14% की दर से ही पाठक बढ़ पा रहे हैं।
आज प्रो.लिंडले और जोसुआ रखेंगे विचार
विभागाध्यक्ष डॉ.सोनाली नरगुंदे ने बताया कि यह पहली अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी है। इसके जरिए पत्रकारिता के विद्यार्थियों को डिजिटल मीडिया से रूबरू करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 29 मार्च शुक्रवार को तीन तकनीकी सत्र रहेंगे। जिसमें प्रो. मार्क लिंडले (वरिष्ठ प्राध्यापक, इंग्लैंड), डॉ.जोसुआ (शोधार्थी, न्यू मीडिया, केन्या), प्रो. श्रीकांत सिंह (विभागाध्यक्ष, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विभाग, माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय, भोपाल), प्रो.रेखा सेलके (प्राचार्य, एमजीएम पत्रकारिता एवं जनसंचार महाविद्यालय, औरंगाबाद) होंगे। अंत में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण के साथ संगोष्ठी का समापन होगा।

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